बाबरी विध्वंस पर आये विशेष अदालत के फैसले पर कांग्रेस ने पूछा ये सवाल

बाबरी विध्वंस पर आये विशेष अदालत के फैसले पर कांग्रेस ने पूछा ये सवाल

नई दिल्ली। अयोध्या में 06 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सुनाये गए फैसले में सभी आरोपियों को बरी किये जाने के बाद कांग्रेस ने सवाल दागे हैं।

कांग्रेस द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सभी दोषियों को बरी करने का विशेष अदालत का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय व संविधान की परिपाटी से परे है।

पार्टी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ के 9 नवंबर, 2049 के निर्णय के मुताबिक बाबरी मस्जिद को गिराया जाना एक गैरकानूनी अपराध था लेकिन विशेष अदालत ने सब दोषियों को बरी कर दिया। विशेष अदालत का निर्णय साफ तौर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के भी प्रतिकूल है।

कांग्रेस ने कहा कि पूरा देश जानता है कि भाजपा-आरएसएस व उनके नेताओं ने राजनैतिक फायदे के लिए देश व समाज के सांप्रदायिक सौहार्द्र को तोड़ने का एक घिनौना षडयंत्र किया था।

पार्टी ने कहा कि उस समय की उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार भी सांप्रदायिक सौहार्द्र भंग करने की इस साजिश में शामिल थी। यहां तक कि उस समय झूठा शपथ पत्र देकर सुप्रीम कोर्ट तक को बरगलाया गया। इन सब पहलुओं, तथ्यों व साक्ष्यों को परखने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद को गिराया जाना गैरकानूनी अपराध ठहराया था।

कांग्रेस ने कहा कि संविधान, सामाजिक सौहार्द्र व भाईचारे में विश्वास करने वाला हर व्यक्ति उम्मीद व अपेक्षा करता है कि विशेष अदालत के इस तर्कविहीन निर्णय के विरुद्ध प्रांतीय व केंद्रीय सरकारें उच्च अदालत में अपील दायर करेंगी तथा बगैर किसी पक्षपात या पूर्वाग्रह के देश के संविधान और कानून की अनुपालना करेंगी। यही संविधान और कानून की सच्ची परिपाटी है।

TeamDigital