मप्र: उपचुनाव को लेकर कांगेस ने बनाया ये प्लान, गोविंद सिंह होंगे नेता प्रतिपक्ष
भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनावों को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने अभी से अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने ग्वालियर-चंबल इलाके से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा गोविन्द सिंह को ज्योतिरादित्य सिंधिया के विकल्प के तौर पर आगे लाने का फैसला किया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भिंड के लहार से विधायक डॉ. गोविंद सिंह का ग्वालियर-चंबल के इलाको में खासा प्रभाव है। विधायकों के इस्तीफा देने के कारण रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव होना हैं। इनमे16 सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके की है। ऐसे में सात बार के विधायक डा गोविन्द सिंह उपचुनाव में पार्टी का चेहरा हो सकते हैं।
पार्टी सूत्रों की माने तो डा गोविन्द सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने के लिए पार्टी के सभी विधायकों ने सहमति जताई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी गोविन्द सिंह को नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपे जाने पर पहले ही अपनी मुहर लगा चुके हैं।
गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में 22 कांग्रेस विधायकों ने अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। अल्पमत में आते ही कमलनाथ सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। कांग्रेस के सामने अब 23 सीटों पर दोबारा जीत हासिल करने की चुनौती है।
जिन दो दर्जन सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें से 23 पर कांग्रेस काबिज थी। एकमात्र आगर मालवा सीट भाजपा के पास थी। आगर से निर्वाचित मनोहर ऊंटवाल और मुरैना की जौरा विधायक रहे बनवारी लाल शर्मा के निधन के कारण ये दोनों सीटें रिक्त हुई हैं। उप चुनाव वाली 16 सीटें चम्बल- ग्वालियर में है।
पार्टी सूत्रों की माने तो उपचुनाव से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति एकबार फिर करवट बदलेगी। सूत्रों ने कहा कि अभी देशभर में चल रहे लॉकडाउन के चलते खबरें बाहर नहीं आ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सभी दिग्गजों से फोन से संपर्क बनाये हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक उपचुनाव जैसे जैसे करीब आएंगे बीजेपी के अंदर की मुश्किलें उभर कर सामने आएँगी। जो कांग्रेस विधायक विधानसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए हैं, उन सभी पूर्व विधायकों को बीजेपी टिकिट दे पाएगी ये बेहद अहम सवाल है।
