कांग्रेस ने किया 12,000 करोड़ के लौह अयस्क निर्यात घोटाले का खुलासा

कांग्रेस ने किया 12,000 करोड़ के लौह अयस्क निर्यात घोटाले का खुलासा

नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर एक और बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए 12,000 करोड़ के लौह अयस्क निर्यात घोटाले का आरोप लगाया है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि 2014 से पहले लौह अयस्क (कच्चा लोहे) का निर्यात सिर्फ MMTC द्वारा ही किया जाता था। और MMTC भी सिर्फ वह लौह अयस्क निर्यात कर सकती थी जिसमें 64 प्रतिशत लोहे की संकेन्द्रण इससे ऊपर के स्तर का लोहा बेचने से पहले MMTC को भी सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिबकी MMTC में 89 प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार की है। लौह अयस्क के निर्यात पर 30 प्रतिशत निर्यात शुल्क भी लगता था।

उन्होंने कहा कि लौह अयस्क के निर्यात पर 30 प्रतिशत निर्यात शुल्क भी लगता था, ड्यूटी भी लगती थी। 2014 से पहले जिनकी सरकारें रही उन्होंने यह इसलिए किया था ताकि उम्दा स्तर का लोहा देश में ही रहे और देश के स्टील प्लांट के उपयोग में आए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 2014 में जब मोदी सरकार आई तो यह तमाम नियम कानून-आनन फनन में बदल दिए गए। स्टील मंत्रालय ने सबसे पहले तो 64 प्रतिशत लौह संकेन्द्रण का नियम बदला और Kudremukh Iron Ore Company Limited (KIOCL) को चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान में लौह अयस्क निर्यात की अनुमति दी। इसके अलावा मंत्रालय ने नीति में एक और परिवर्तन करते हुए यह घोषणा की कि लौह अयस्क पर तो 30 प्रतिशत निर्यात शुल्क जारी रहेंगे लेकिन अगर यह लौह अयस्क छर्रों के रूप में निर्यात किया जाए तो उस पर कोई निर्यात शुल्क लागू नहीं होगा।

उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मोदी सरकार में मंत्रालय ने नीति में एक और परिवर्तन करते हुए यह घोषणा की कि लौह अयस्क पर तो 30% निर्यात शुल्क जारी रहेंगे लेकिन अगर यह लौह अयस्क छर्रों के रूप में निर्यात किया जाए तो उस पर कोई निर्यात शुल्क लागू नहीं होगा।

पवन खेड़ा ने कहा कि अनुमान यह है कि इन निजी कंपनियों ने 2014 से अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रूपये का लौह अयस्क निर्यात किया है। स्मरण रहे कि इन कंपनियों के पास लौह अयस्क को निर्यात करने की कोई अनुमति नहीं थी।

उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से न केवल भारत के प्राकृतिक संसाधन को लुटाया गया बल्कि 12,000 करोड़ रुपये का निर्यात शुल्क भी चोरी किया गया। विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) एक्ट 1992 के तहत इन कंपनियों पर लौह अयस्क छर्रों के गैर कानूनी निर्यात पर 2 लाख करोड़ का जुर्माना बनता है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह न केवल विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम 1992 के तहत गैर कानूनी है बल्कि कस्टम एक्ट 1962 के तहत भी यह गंभीर अपराध माना जाता है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या 2014 से लेकर अब तक क्या सरकार ने या सरकार की किसी भी जांच एजेंसी ने लौह अयस्क के गैर कानूनी निर्यात को लेकर किसी भी निजी क्षेत्र की कंपनी की जांच की?

TeamDigital