इमरजेंसी के 50 साल: बीजेपी और कांग्रेस ने एक दूसरे पर साधा निशाना
नई दिल्ली। देश में 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर बीजेपी और कांग्रेस ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि कोई भी भारतीय यह कभी नहीं भूलेगा कि आपातकाल के दौरान किस तरह संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया। उन्होंने संवैधानिक सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में मोदी ने कहा कि यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक था। उन्होंने कहा कि संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया तथा बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसा लग रहा था जैसे उस समय सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया था।”
मोदी सरकार ने पिछले साल घोषणा की थी कि आपातकाल की वर्षगांठ को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 42वां संशोधन, जिसने संविधान में व्यापक परिवर्तन किए थे और जिसे जनता पार्टी सरकार ने रद्द कर दिया था, आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस सरकार की चालाकी का प्रमुख उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और दलितों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया और उनकी गरिमा का अपमान किया गया। मोदी ने कहा, “हम अपने संविधान के सिद्धांतों को मजबूत करने और विकसित भारत के अपने दृष्टिकोण को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराते हैं। हम प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूएं और गरीबों और दलितों के सपनों को पूरा करें।”
आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में दृढ़ता से खड़े रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पूरे भारत के लोग थे, सभी क्षेत्रों से, विभिन्न विचारधाराओं से, जिन्होंने एक लक्ष्य के साथ एक-दूसरे के साथ मिलकर काम किया: भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा करना और उन आदर्शों को संरक्षित करना जिनके लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा, “यह उनका सामूहिक संघर्ष ही था जिसने सुनिश्चित किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करना पड़ा और नए चुनाव कराने पड़े, जिसमें वे बुरी तरह हार गए।”
वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस ने बीजेपी पर जवाबी हमले में मोदी सरकार के 11 साल के शासन को अघोषित आपातकाल की संज्ञा दी। कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारतीय लोकतंत्र पर “व्यवस्थित और खतरनाक” पांच गुना हमला हुआ है, जिसे “अघोषित आपातकाल@11” के रूप में वर्णित किया जा सकता है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार संसद को कमजोर कर रही है तथा संवैधानिक निकायों की स्वायत्तता को खत्म कर रही है। विपक्षी पार्टी ने यह भी दावा किया कि “अनियंत्रित घृणास्पद भाषण और नागरिक स्वतंत्रता पर दमन” हुआ है।
एक बयान में, कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार के आलोचकों को नियमित रूप से बदनाम किया जाता है, सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान द्वारा जानबूझकर नफरत और कट्टरता फैलाई जाती है, प्रदर्शनकारी किसानों को “खालिस्तानी” करार दिया जाता है, और जाति जनगणना के समर्थकों को “शहरी नक्सली” करार दिया जाता है।
उन्होंने दावा किया, “महात्मा गांधी के हत्यारों का महिमामंडन किया जा रहा है। अल्पसंख्यक अपने जीवन और संपत्ति के डर में जी रहे हैं। दलितों और अन्य हाशिए के समूहों को असंगत रूप से निशाना बनाया गया है और नफरत भरे भाषण देने वाले मंत्रियों को पदोन्नति से पुरस्कृत किया गया है।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे दिन आई है जब सरकार आपातकाल लागू होने की वर्षगांठ पर ‘संविधान हत्या दिवस’ मना रही है। अपने बयान में रमेश ने कहा, “पिछले ग्यारह वर्षों और तीस दिनों में, भारतीय लोकतंत्र एक व्यवस्थित और खतरनाक पांच गुना हमले के अधीन रहा है, जिसे सबसे अच्छे ढंग से अघोषित आपातकाल@11 के रूप में वर्णित किया जा सकता है।”
