गाज़ीपुर बॉर्डर पर एक और किसान ने की आत्महत्या, सरकार को बताया ज़िम्मेदार

गाज़ीपुर बॉर्डर पर एक और किसान ने की आत्महत्या, सरकार को बताया ज़िम्मेदार

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के 38वे दिन भी किसान डंटे हुए हैं। इस बीच गाज़ीपुर बॉर्डर पर आज एक और किसान ने आत्म हत्या कर ली। मृतक किसान ने अपने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए सरकार को ज़िम्मेदार बताया है।

मृतक कश्मीर सिंह नामक किसान ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरा अंतिम संस्कार मेरे पोते-बच्चे के हाथों यहीं दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर होना चाहिए। उनका परिवार बेटा-पोता यहीं आंदोलन में निरंतर सेवा कर रहे हैं। आखिर हम कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे। सुसाइड नोट में कहा गया है कि यह सरकार सुन नहीं रही है इसलिए अपनी जान देकर जा रहा हूं। मृतक किसान के सुसाइड नोट को यूपी पुलिस ने अपने कब्ज़े में ले लिया है।

इससे पहले कल 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक में तय किया गया कि यदि 4 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में भी किसानो की मांगे नहीं मानी जातीं तो 6 जनवरी से देशभर में जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा। इतना ही नहीं 6 जनवरी को किसान केएमपी राजमार्ग पर मार्च निकालेंगे।

बैठक के बाद स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा,”4 तारीख (4जनवरी) को हमारी वार्ता है, अगर परिणाम संतोषजनक नहीं निकलते हैं तो 6 तारीख को KMP राजमार्ग पर मार्च किया जाएगा। 6 तारीख से 20 तारीख तक 2 हफ्ते पूरे देश में देश जागृति अभियान चलाया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि किसानों के ये आंदोलन अब निर्णायक दौर में है, 30 तारीख की वार्ता के बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि अभी तो पूंछ निकली है, हाथी निकलना अभी बाकी है। MSP को क़ानूनी अधिकार मिलने और तीनों कृषि क़ानूनों को खारिज करने पर सरकार टस से मस नहीं हुई है।

शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार किसान आंदोलन को हल्के में ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों को हटाने में सफल हो गई थी, इसलिए वह किसान आंदोलन के साथ भी वैसा ही करने की सोच रही है, लेकिन ऐसा दिन कभी नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि अगर 4 जनवरी को सरकार कोई फैसला नहीं लेती तो किसान फैसला ले लेंगे।

TeamDigital