किसी दक्षिणपंथी संस्था ने रची थी गोधरा काण्ड की साजिश, ताकि मुस्लिमों पर लगे दंगों का आरोप
नई दिल्ली । भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन रहे चुके जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने अपने फेसबुक पर 2002 में हुए गोधरा दंगों के संबंध में एक पोस्ट में गुजरात दंगों को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय जाहिर की है।
काटजू का मानना है कि गोधरा दंगों के पीछे कुछ दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की सुनियोजित चाल थी। इन हिंदू संगठनों ने साबरमती एक्सप्रेस में अपने ही समुदाय के कुछ लोगों की हत्या की साजिश रची, जिससे मुस्लिमों पर आरोप मढ़ा जा सके। गोधरा की घटना मुझे ग्लिविट्ज घटना की याद दिलाती है।’ उन्होंने इसे अपनी निजी राय बताया है ।
काटजू ने आगे लिखा, ‘इस क्रिया की प्रतिक्रिया वाले सिद्धांत से मैं इत्तेफाक नहीं रखता। नाजियों ने भी यहूदियों के विरुद्ध 10 नवंबर 1938 में किए गए अत्याचार को पेरिस में जर्मन राजनयिक की हुई हत्या के बाद जन समुदाय में पनपे आक्रोश का नतीजा बताया था। जबकि सबको पता है कि यह गोएरिंग, हिमलर और हेड्रिक द्वारा पहले से सुनियोजित षड़यंत्र था।’
उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरा अपना व्यक्तिगत मत है कि जस्टिस काटजू ने हाल ही में महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट और सुभाष चंद्र बोस को जापानी एजेंट बताया था। इस बयान को लेकर संसद में भी हंगामा हुआ था। उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी ‘खाली दिमाग आदमी’ बताया है।
‘गुजरात के गोधरा में 2002 में हुए साम्प्रदायिक दंगों में 2000 से अधिक मुसलमानों की मौत हुयी थी। इसमें कांग्रेस के एक पूर्व मुस्लिम सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे। कुछ लोगों ने इस घटना को साबरमती एक्सप्रेस में हिंदू समुदाय के 54 लोगों को आग लगाकर मौत के घाट उतारे दिए जाने के बाद की प्रतिक्रिया बताया। कहा गया कि साबरमती एक्सप्रेस में हुई घटना के बाद यह हिंदुओ में पनपे आक्रोश का नतीजा था।’
