लालू की रिहाई का इंतज़ार, फिर राजनीतिक करवट बदलेगा बिहार
नई दिल्ली। बिहार में भले ही एनडीए को बहुमत मिल गया हो और नई सरकार के गठन की तैयारी चल रही हो लेकिन दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल के वफादार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की रिहाई का इंतज़ार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि दुमका कोषागार गबन मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई टलने के कारण चुनाव परिणाम आने से पहले उनकी रिहाई नहीं हो सकी। अब लालू यादव की ज़मानत अर्ज़ी पर झारखंड हाईकोर्ट 27 नवंबर को सुनवाई करेगा।
कानून के जानकारों के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव में तीन मामलो में पहले ही ज़मानत मिल गई चुकी है।अंतिम मामले में 27 नवंबर को ज़मानत मिलने के साथ ही उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हो जायेगा।

लालू यादव की रिहाई के बाद बदले की बिहार की राजनीति:
जानकारों की माने तो राजनीति के धुरंधर लालू प्रसाद यादव के बिहार में कदम रखते ही राज्य की राजनीति में परिवर्तन होना तय है। कई चेहरे जो आज एनडीए के साथ हैं या जो महागठबंधन छोड़कर जा चुके हैं, वे कभी लालू यादव इर्दगिर्द रहा करते थे।
ऐसे में जब लालू यादव जेल से रिहा होकर बिहार पहुंचेंगे तो वे उन सभी लोगों से भी संवाद करेंगे, जो चुनाव से पहले अपनी महत्वाकांक्षाओं के कारण राजद का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए। जीतनराम मांझी पर लालू यादव के पुराने अहसान हैं। लालू यादव की पहल पर ही उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया था। यह अलग बात है कि मांझी को अपनी कमियों से जल्द कुर्सी से हाथ धोना पड़ गया लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचाने वाले लालू यादव ही थे।
जानकारों की माने तो जब लालू यादव जीतनराम मांझी को बुलाएंगे तो कोई कारण ऐसा नहीं है कि बिहार में 4 जीतने वाले जीतनराम मांझी मिलने न पहुंचे। भले ही राजनैतिक कारणों से मांझी दिन के उजाले में लालू से न मिलें लेकिन मुलाकात के लिए रात का अंधेरा कोई समस्या नहीं बनेगा।
ठीक इसी तरह विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी को लेकर भी है। मुकेश सहनी की पार्टी ने बिहार में 4 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि खुद मुकेश सहनी चुनाव नहीं जीत सके हैं।
जानकारों के मुताबिक राजनीति में कोई किसी का स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। लालू जेपी युग से बिहार की राजनीति लिखते रहे हैं। उन्हें मालूम है कब किस मोहरे को कहां रखना है। राजनैतिक अनुभव न होने के कारण भले ही तेजस्वी सरकार बनाने से चूंक गए हों लेकिन लालू अपने पुराने प्रतिद्वंदी नीतीश कुमार के इर्दगिर्द भी घेरा डालने में देर नहीं लगाएंगे।
बिहार में चुनाव परिणाम आने के बाद सबकुछ खत्म नहीं हो गया है। बल्कि आज से राजद के अंदर बहुत कुछ शुरू हुआ है। फिलहाल इंतज़ार लालू की रिहाई का है। वक़्त के साथ बहुत कुछ बदलेगा लेकिन उसके लिए लालू यादव की बिहार में एंट्री ज़रूरी है।
