प्रवासी मजदूरों का टूटा सब्र का बांध, लॉकडाउन तोड़कर प्रदर्शन, तोड़फोड़
सूरत। देश में लागू किये गए 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते गुजरात के सूरत में फंसे प्रवासी मजदूरों का शुक्रवार को सब्र का बाँध टूट गया और उन्होंने सड़को पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया तथा तोड़फोड़ की। प्रवासी मजदूर वापस उनके घर भेजने की व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात सूरत के लसकाना इलाके में लॉकडाउन से परेशान होकर सैकड़ों प्रवासी मजदूर सड़कों पर उतर आए थे। वह अपने घरों को लौटने के लिए समुचित व्यवस्था किए जाने और उनके बकाये का जल्द से जल्द भुगतान करने की मांग कर रहे थे।
एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे इनमें से कुछ मजदूरों ने अपने गृह राज्य लौटने देने की मांग करते हुए वहां रखे हाथ ठेलों और दूसरे वाहनों में आग लगा दी और तोड़फोड़ की। उग्र प्रदर्शन को रोकने के लिए पहुंची पुलिस ने कुछ मजदूरों को मौके से हिरासत में ले लिया। तब कहीं जाकर स्थिति काबू में आई।
सूरत पुलिस ने इस मामले में करीब 80 प्रवासी मजदूरों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया है। ये मजदूर एक टेक्सटाइल मिल में काम करते थे लेकिन लॉकडाउन के बाद टेक्सटाइल मिल बंद होने के कारण अब इनके पास आजीविका चलाने का कोई साधन नहीं है और न ही ये वापस अपने घरो को जा पा रहे हैं।
गौरतलब है कि देश में लागू किये गए 21 दिनों के लॉकडाउन की अवधि 14अप्रेल को रात 12 बजे समाप्त हो रही है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ बैठक की है।
माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद पीएम मोदी लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। हालाँकि दो राज्यों ओडिशा और पंजाब ने पहले ही लॉकडाउन की अवधि 30 अप्रेल तक बढ़ाने का एलान कर दिया है।
पीएम मोदी के साथ आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिये हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में लॉकडाउन की अवधि 30 अप्रेल तक बढ़ाने की सिफारिश की। जानकारी के मुताबिक बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाये जाने पर सहमति जताई है।
वहीँ डब्ल्यूएचओ की ओर से इस बैठक से एक दिन पहले बयान जारी किया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियां अगर जल्दबाजी में खत्म की गईं तो इसके घातक परिणाम हो सकते हैं।
