J&K: उमर की चुनौती के बाद राम माधव को वापस लेना पड़ा बयान

J&K: उमर की चुनौती के बाद राम माधव को वापस लेना पड़ा बयान

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में नई सरकार बनाने की कोशिशों को पलीता लगने के बाद बीजेपी और गैर बीजेपी दलों के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस द्वारा मिलकर राज्य में सरकार बनाने की कोशिशों में पाक कनेक्शन जोड़ने वाले बीजेपी नेता राम माधव को अपना बयान वापस लेना पड़ा है।

गुरूवार को बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि “पीडीपी-एनसी ने पिछले महीने निकाय चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया था, वो आदेश भी उन्हें बॉर्डर के पार से आया था। ऐसा लगता है कि राज्य में सरकार बनाने को लेकर उन्हें नए आदेश मिले होंगे। इसी कारण राज्यपाल को ये फैसला लेना पड़ा।”

राम माधव के बयान पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सख्त नाराज़गी जताते हुए ट्विटर पर कहा कि “मैं आपको चैलेंज करता हूं कि इन आरोपों को सिद्ध करके दिखाएं। आपके पास रॉ-एनआईए-सीबीआई है, जांच कर पब्लिक डोमेन में ला सकते हैं. या तो इन आरोपों को साबित करें अन्यथा माफी मांगें।”

अपने बयान पर घिरता देख राम माधव ने अपना बयान वापस लेने में देरी नहीं की। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि “बीजेपी नेता राम माधव ने ट्वीट किया कि मैं अपने शब्द वापस लेता हूं, लेकिन पीडीपी-एनसी का सरकार बनाने का प्रयास असफल रहा। जो भी मेरा कमेंट किया था वह राजनीतिक था, पर्सनल नहीं था।”

गौरतलब है कि बुधवार शाम को महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी के 29, एनसी के 15 और कांग्रेस के 12 विधायकों को मिलाकर 56 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा करते हुए सरकार बनाने की पेशकश की थी। जिसके बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का फैसला किया।

राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किये जाने पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अभी पार्टियों में बात भी नहीं हुई थी और विधायकों की बैठक बुलाई गई थी लेकिन बीजेपी नहीं चाहती जम्मू कश्मीर में कोई सरकार बने।

आजाद ने कहा कि बीजेपी का तानाशाही रवैया फिर सामने आया है। अफवाहों से बीजेपी डर गई और विधानसभा भंग कर दी गई. आजाद ने कहा कि हम प्रदेश में चुनाव चाहते हैं।

वहीँ पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किये जाने पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा भंग करने से पहले राज्यपाल को स्थति का आंकलन करना चाहिए था।

वहीँ नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि ‘इसे संयोग नहीं मान सकते कि इधर महबूबा मुफ्ती सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रही थीं और उधर राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी।’

TeamDigital