ख़त्म हो रहा पीएम मोदी का जादू, गुजरात चुनाव परिणाम हैं सबूत
नई दिल्ली(राजाज़ैद)। भारतीय जनता पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे के सहारे नैया पार लगाने की सोच रही है लेकिन गुजरात चुनाव के बाद एक बड़ी हकीकत यह सामने आयी है कि पीएम मोदी का जादू अब ढलान पर है।
गुजरात चुनाव परिणामो पर एक नज़र डालें तो पता चलता है कि पूरा चुनाव कांग्रेस के पक्ष में हो गया था। परिणामो से पता चलता है कि 16 विधानसभा सीटें बीजेपी ने 3000 से भी कम के मतों के अंतर् से जीती हैं। इसके एक बड़ा फेक्टर नोटा और बहुजन समाज पार्टी का भी है। यदि इन सीटों पर भी कांग्रेस ने जीत हासिल की होती तो गुजरात में बीजेपी को विपक्ष में बैठना पड़ता।
जानकारों के मुताबिक बीजेपी भले ही गुजरात में जीत को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन बड़ी सच्चाई यह है कि उसके लिए एक बड़े खतरे का अलार्म बज चूका है। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी के रोड शो और चुनावी सभाओं में भीड़ न जुट पाना इस बात का बड़ा सबूत है कि अब उनका करिश्मा समाप्त होने की तरफ है।
जानकारो की माने तो गुजरात चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में हुई करिश्माई बढ़ोत्तरी आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हाशिये पर धकेल सकती है। यदि गुजरात विधानसभा चुनावो के वोट शेयर को आधार माने तो 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात में सभी 26 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी को अगले लोकसभा चुनाव में 8 सीटों से अधिक नहीं मिलेंगी।
जानकारों की राय में बीजेपी की लोकप्रियता में आयी कमी सिर्फ गुजरात ही नहीं पूरे देश में है। नोट बंदी और जीएसटी लागू करने के बाद देशभर में मोदी सरकार की लोकप्रियता का ग्राफ गिरा है। वहीँ देशभर में हो रही असहिष्णुता की घटनाओं ने मध्यम वर्ग और बुद्धजीवियों को अपनी सोच बदलने को मजबूर किया है।
महंगाई और बेरोज़गारी के मुद्दे पर फिसड्डी साबित हुई मोदी सरकार की असल चुनौतियाँ अब शुरू हुई हैं। देश में महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी के मुद्दे को उठाकर 2014 में सत्ता में आयी बीजेपी इन्ही मुद्दों पर कटघरे में खड़ी है।
गुजरात चूँकि पीएम मोदी और अमित शाह का गृह राज्य भी है। इसके बावजूद गुजरात में बीजेपी को जीत के लिए एड़ी चोटी का बल लगाना पड़ा परन्तु पिछले चुनावो की तुलना में न सिर्फ सीटें कम हुईं बल्कि वोट शेयर भी गिरा है। ऐसे में मध्य प्रदेश और राजस्थान को फिर से जीतना बीजेपी के लिए लोहे के चने चबाने से कम नहीं होगा। जानकारों की माने तो बीजेपी शासित राज्यों की स्थति बहुत अच्छी नहीं है। अगले वर्ष राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।
राजस्थान और मध्य प्रदेश की सरकारों का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं है। दोनों ही राज्यों में किसान सरकार से नाराज़ हैं। ऐसे में बीजेपी क्या करेगी ये आने वाला समय तय करेगा। गुजरात चुनाव प्रचार के अंतिम एक सप्ताह में पाकिस्तान और गुजरात अस्मिता का मामला उठाकर पीएम मोदी ने भले ही मतदाताओं की भावनाओं का लाभ लेकर उनसे वोट ले लिया हो लेकिन क्या राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी ऐसे मुद्दे बीजेपी के लिए कारगर साबित होंगे ? ये बड़ा सवाल है।
