सरकार ने ई-सिगरेट पर लगाई रोक, इतने साल की होगी जेल

सरकार ने ई-सिगरेट पर लगाई रोक, इतने साल की होगी जेल

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज सम्पन्न हुई कैबिनेट की बैठक में ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया। कैबिनेट के फैसले के बाद अब भारत में ई-सिगरेट के उत्पादन, बेचने, इंपोर्ट, एक्सपोर्ट, ट्रांसपोर्ट, बिक्री, डिस्ट्रीब्यूशन, स्टोरेज और विज्ञापन पर प्रतिबंध रहेगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने अध्यादेश में ई सिगरेट को लेकर पहली बार नियमों के उल्लंघन पर एक साल तक की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना का प्रस्ताव दिया है। वहीं एक से अधिक बार नियम तोड़ने पर मिनिस्ट्री ने 5 लाख रुपये जुर्माना और 3 साल तक जेल की सिफारिश की गई है।

बता दें कि ई-सिगरेट, हीट-नॉट-बर्न स्मोकिंग डिवाइसेस, वेप एंड ई-निकोटीन फ्लेवर्ड हुक्का जैसे वैकल्पिक धूम्रपान उपकरणों पर प्रतिबंध लगाना अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार के पहले 100 दिनों के एजेंडे की प्राथमिकताओं में था।

क्या होती है E सिगरेट:

ई-सिगरेट एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक इनहेलर होता है, जिसमें निकोटिन और अन्य कैमिकलयुक्त लिक्विड भरा जाता है। ये इनहेलर बैट्री की ऊर्जा से इस लिक्विड को भाप में बदलता है, जिससे पीने वाले को सिगरेट पीने जैसा अहसास होता है।

ईएनडीएस ऐसे उपकरणों को कहा जाता है, जिनका प्रयोग किसी घोल को गर्म कर एरोसोल बनाने के लिए किया जाता है, जिसमें विभिन्न फ्लेवर भी होते हैं।

ई-सिगरेट में जिस लिक्विड का इस्तेमाल किया जाता है, वह कई बार निकोटिन होता है और कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक रसायन होते हैं। इसके अलावा कुछ ब्रांड्स ई-सिगरेट में फॉर्मलडिहाइड का इस्तेमाल करते हैं, जो बेहद खतरनाक और कैंसरकारी तत्व हैं।

चीन, फिलीपींस, हांगकांग के बाद भारत में ई सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ा। धूम्रपान के आदी लोगों ने ई सिगरेट को सिगरेट, सिगार या पाइप जैसे धुम्रपान वाले तम्बाकू उत्पादों के एक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया।

विकिपीडिया के मुताबिक 2003 में एक चीनी फार्मासिस्ट होन लिक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का आविष्कार किया गया। उनकी कंपनी गोल्डन ड्रैगन होल्डिंग्स ने 2005-2006 में विदेशों में इसकी बिक्री शुरू की और बाद में इसका नाम बदलकर रूयान (मतलब, धूम्रपान के जैसा”) रखा गया।

TeamDigital