विपक्ष एक हुआ तो देशभर में न हो जाए कैराना जैसा हाल, इसलिए बीजेपी बना रही ये नया प्लान

विपक्ष एक हुआ तो देशभर में न हो जाए कैराना जैसा हाल, इसलिए बीजेपी बना रही ये नया प्लान

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। अगले वर्ष होने जा रहे आम चुनावो के लिए बीजेपी के पास जनता के समक्ष रखने के लिए पुरानी 2014 के चुनाव वाली तस्वीर नहीं है। 2014 में नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने करिश्माई व्यक्तित्व की तरह पेश किया था और जनता तो कई उम्मीदें दी थीं लेकिन जनता की अधिकतर उम्मीदें पूरी नहीं हुईं और शेष रहे समय में पूरा होने की संभावनाएं भी खत्म हो चुकी हैं।

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के समक्ष एक बड़ा प्रश्न यह है कि 2019 के आम चुनाव में जनता के समक्ष ऐसी कौन सी तस्वीर पेश की जाए। जिससे उसे एक बार फिर से सत्ता में आने का मौका मिल सके।

2014 के आम चुनावो में बीजेपी ने विदेशो से काला धन वापस लाने, महंगाई कम करने, महिला सुरक्षा, प्रतिवर्ष दो करोड़ नौकरियां देने, गंगा की सफाई और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने जैसे अहम वादे किये थे।

मोदी सरकार के कार्यकाल के करीब 4 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वादे पूरे नहीं हो सके हैं। और अब समय बेहद कम बचा है इसलिए वादे पूरे होने की उम्मीद खुद बीजेपी नेताओं को भी नहीं है।

सबसे अहम बात यह है कि 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी को जिस तरह एक ब्रांड के तौर पर पेश किया गया, देश की जनता उस ब्रांड को भी देख चुकी है। इसलिए 2014 वाला करिश्मा होना मुमकिन नहीं है। खुद बीजेपी नेता दबी ज़ुबान में इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि 2019 आते आते ब्रांड मोदी कमज़ोर पड़ता जा रहा है।

बीजेपी ने 2014 में जिस काले धन को विदेशो से वापस लाने की बात कही थी, वह काला धन तो विदेशो से नहीं आया बल्कि जो देश का वाइट मनी था वह भी नीरव मोदी , ललित मोदी और मेहुल चौकसी जैसे कुछ लोग लेकर विदेश भाग गए।

2014 के चुनावी घोषणा पत्र में बीजेपी ने देश में महंगाई बढ़ने के लिए यूपीए सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार बताया था। घोषणा पत्र में साफ तौर पर लिखा गया था कि “खाने – पीने के सामान के बढ़ते दामों ने घरो का बजट बिगाड़ दिया है और कांग्रेस नीति यूपीए सरकार की देखरेख में कुल मिलाकर महंगाई बहुत तेजी से बढ़ी है। यहाँ तक कि लाखो करोडो लोगों की खाध्य और पोषण सुरक्षा खतरे में पड़ गयी है। “

महंगाई को लेकर बीजेपी द्वारा 2014 में यूपीए सरकार पर कैसे गए तंज वर्ष 2018 आते आते उलटे पड़ने लगे। पैट्रोल डीजल की कीमतों से लेकर खाने पीने की चीजों की कीमतों में कमी नहीं आयी। ऐसे में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2019 का चुनावी एजेंडा सैट करने की है।

सूत्रों की माने तो 2019 के आम चुनाव में विपक्ष की एकजुट की संभावनाओं को देखते हुए पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता उपचुनावों के परिणामो ने पैदा की है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के चुनावी रणनीतिकारो को डर कि कहीं विपक्ष के एकजुट होने से देशभर में कैराना जैसी स्थति न पैदा हो जाए। इसलिए पार्टी के लोग अभी से माथा पच्ची में जुटे हैं।

2022 तक होंगे सभी वादे पूरे:

बीजेपी नेता सुब्रमणियम स्वामी के कल आये बयान को आधार माना जाए तो “बीजेपी को किसी भी हाल में 2019 की सत्ता चाहिए भले ही उसके 2014 के चुनावी वादे पूरे नही हुए हैं।” स्वामी ने यह बात ट्विटर पर अपने एक ट्वीट में कही।

बीजेपी सूत्रों की माने तो 2019 में जनता से कहा जाएगा कि पिछली सरकारों के कामो को दुरुस्त करने में अधिक समय लगा इसलिए सभी वादे पूरे नहीं हो सके लेकिन 2019 में फिर से जनादेश मिला तो शेष रहे वादे भी पूरे होंगे। इन वादों में भले ही राम मंदिर, कश्मीर में धारा 370 हटाने का काम जैसे वादों नाम लेकर का उल्लेख नहीं किया जाए लेकिन इशारा इसी तरफ किया जाएगा। जिससे राम मंदिर की आस लगाए बैठे लोग 2019 में बीजेपी को एक मौका और दे दें।

फिलहाल देखना है कि देश का वह मतदाता जिसने 2014 में बीजेपी को वोट दिया था, क्या वह फिर से बीजेपी को वोट देगा अथवा नहीं। हालाँकि अभी आम चुनावो में ख़ासा समय बाकी है लेकिन सूत्रों की माने तो बीजेपी दो कोशिशों पर काम कर रही है।

एक न हो पाए विपक्ष:

पहला यह कि विपक्ष एकजुट न हो पाए और अगर एकजुट हो तो एक तीसरा मोर्चा बने जिसमे कांग्रेस शामिल न हो पाए। दूसरा यह कि चुनाव आते आते इस सन्देश को बड़े स्तर पर प्रसारित किया जाए कि 2014 के जो वादे शेष रहे हैं, वे सभी वादे 2019 में सत्ता मिलने के बाद पूरे किया जाएंगे। इनमे कानून बनाकर राममंदिर का निर्माण, कॉमन सिविल कोड, धारा 370 जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी उछाला जा सकता है।

TeamDigital