विधानसभा चुनाव: बीजेपी को भारी न पड़ जाएँ पेट्रोल-डीजल और प्याज की बढ़ती कीमतें
नई दिल्ली। महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को विधानसभा का चुनाव होगा। दोनों राज्यों में मुख्यतः कांग्रेस और बीजेपी के बीच आमने सामने का मुकाबला है। लोकसभा चुनाव के बाद हो रहे पहले विधानसभा चुनाव के लिए दोनों ही पार्टियां अपनी तैयारियों को अंतिम रुप देने में जुटी हैं।
अहम बात यह है कि जिन दो राज्यों में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है, वहां बीजेपी की सरकार है और पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों ही राज्यों में कांग्रेस को सत्ता से बाहर धकेलकर बीजेपी ने सत्ता पर कब्ज़ा किया था।
महाराष्ट्र में जहाँ कांग्रेस ने मुख्यतः एनसीपी से गठबंधन किया है वहीँ बीजेपी का शिवसेना के साथ गठबंधन है। वहीँ हरियाणा में कांग्रेस और बीजेपी में आमने सामने का मुकाबला होगा।
बीजेपी की मुश्किलें :
दोनों ही राज्यों महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी सत्तारूढ़ दल है। ऐसे में चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि भले ही बीजेपी इस बात को स्वीकार न करे लेकिन पार्टी को एंटी इंकबेंसी का सामना करना पड़ सकता है।
महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी सरकारों की पांच साल में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। जिसके करिश्मे को चुनाव में भुनाया जा सके। ऐसी स्थति में बीजेपी अपने पारम्परिक मुद्दों के इर्द गिर्द ही चुनाव लड़ेगी। इसलिए यह तय है कि चुनाव में पाकिस्तान, तीन तलाक, धारा 370 और एनआरसी जैसे मुद्दे बीजेपी नेताओं के सिर चढ़कर बोलेंगे।
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी, आर्थिक मंदी, बढ़ती बेरोज़गारी, महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में किसान आत्म हत्या और लगातार बढ़ रही प्याज की कीमतें चुनाव में बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा कर सकती हैं।
यही नहीं महाराष्ट्र और हरियाणा के पड़ौसी राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकारों की मौजूदगी चुनाव में बीजेपी के हौसले पस्त कर सकती हैं।
कांग्रेस ने बनाई रणनीति:
महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने इस बार रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों, प्रदेश प्रभारियों की बैठक में चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों बेरोज़गारी, आर्थिक मंदी, किसानो की समस्याओं, महंगाई और बढ़ते अपराधों को तरजीह दी जाएगी, इसके अलावा राज्यों से जुड़े मुद्दे उठाकर प्रदेश की सरकारों की नाकामियों को उजागर किया जाएगा।
सूत्रों मके मुताबिक पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं को इस बात के विशेष निर्देश दिए हैं कि चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले न किये जाएँ और जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मुद्दे को न छेड़ा जाए।
सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी चाहती हैं कि चुनाव के दौरान प्रदेश सरकार की नाकामियों को उजागर करने के साथ साथ उन राष्ट्रीय मुद्दों पर वॉर किया जाए जो मोदी सरकार से जुड़े हैं।
