राहुल ने फिर दोहराया: राफेल की जानकारी सिर्फ पीएम के पास, पर वे बोलेंगे नहीं

राहुल ने फिर दोहराया: राफेल की जानकारी सिर्फ पीएम के पास, पर वे बोलेंगे नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान डील को लेकर एक बार फिर पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास चार ‘राफेल मंत्री’ रहे। लेकिन, उनमें से कोई भी यह नहीं जानता कि वास्तव में फ्रांस में क्या हुआ। इसकी जानकारी केवल प्रधानमंत्री को है पर वे कुछ बोलेंगे नहीं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा कि मोदी के सत्ता में आने के बाद बार-बार रक्षा मंत्री इस लिए बदले गए क्योंकि प्रधानमंत्री निजी तौर पर सौदे को लेकर फिर से तोल-मोल कर सकें।

राहुल गांधी ने कहा कि 2014 के बाद से भारत के पास आने-जाने वाले चार रक्षा मंत्री रहे। अब हमें पता चला कि ऐसा क्यों हुआ। उऩ्होंने कहा कि रक्षा मंत्रियों को बदलने से प्रधानमंत्री को निजी तौर पर राफेल को लेकर फ्रांस के साथ तोल-मोल करने का मौका मिल गया।

पीएम और रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस :

कांग्रेस ने राफेल विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा निर्मला सीतारमण पर संसद को गुमराह करने का आरोप वाला विशेषाधिकार हनन नोटिस बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को दिया।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, वीरप्पा मोइली, केवी थॉमस, ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजीव सातव की ओर से मोदी और सीतारमण के खिलाफ दिए गए अलग-अलग नोटिस में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए राफेल सौदे को लेकर लोकसभा को गुमराह करने वाला बयान दिया। साथ ही रक्षा मंत्री ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए इस मामले में सदन को ‘गुमराह किया’।

कांग्रेस नेताओं ने लोकसभा में कार्यवाही एवं प्रक्रिया के नियम 222 का हवाला देते हुए मोदी और सीतारमण के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया था कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत का खुलासा करना राष्ट्रहित के खिलाफ है और इस मांग को दोनों देशों की सरकारों ने इनकार किया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आगे यह भी दावा किया था कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल विमानों की खरीद के लिए हुआ सौदा पूरी तरह पारदर्शी है, जबकि रक्षा मंत्री ने सदन में उनकी मौजूदगी में 2008 के गोपनीयता संबंधी समझौते का हवाला देते हुए विमान की कीमत बताने से इनकार कर दिया था।

खड़गे ने कहाकि फ्रांस की सरकार ने अपने बयान में उस मांग को खारिज नहीं किया था जो विपक्ष ने की थी और यह मांग राफेल विमान की कीमत बताने की है। प्रधानमंत्री इस बात से पूरी तरह अवगत थे कि 2008 का गोपनीयता संबंधी समझौता खरीद, बिक्री और प्रौद्योगिकी हस्तानांतरण सहित रक्षा सहयोग के संदर्भ में हुआ था।

उन्होंने यह भी कहा कि 2008 का समझौता कहीं भी यह नहीं कहता है कि रक्षा सौदे में खरीद की वाणिज्यिक कीमत का खुलासा नहीं किया जा सकता। समझौते का प्रावधान-1 यह स्पष्ट रूप से कहता है कि गोपनीय सूचना एवं सामग्री का तात्पर्य उससे है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में संरक्षित रखने की जरूरत होती है।

लोकसभा में कांग्रेस नेता ने कहा कि यह राफेल के संदर्भ में नहीं है और यह समझौता कहीं भी इस बात से नहीं रोकता कि संसद को विमान की कीमत बताई जाए।

खड़गे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री का पारदर्शिता का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत, असत्य है और यह बात सदन को गुमराह करने की मंशा से बोली गई। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 75(3) के तहत प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमंडल की संसद के जरिए देश की जनता के प्रति सामूहिक जवाबदेही होती है।

रक्षा मंत्री के खिलाफ दिए नोटिस में खड़गे ने रक्षा मंत्री ने उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने 2008 के समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि विमान की कीमत नहीं बताई जा सकती।

खड़गे ने कहा कि मंत्री ने सदन में जो बात रखी वो पूरी तरह गलत है। उन्होंने न सिर्फ सदन को गुमराह किया, बल्कि पूरे देश को गुमराह किया। मंत्री ने यह जानते हुए भी सदन को गुमराह किया कि सरकार संसद के समक्ष इसका (कीमत का) खुलासा करने को बाध्य है।

TeamDigital