रामगढ लिचिंग: हत्या के एक साल बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा पीड़ित परिवार
नई दिल्ली। बीते वर्ष झारखंड के रामगढ़ में गौमांस के शक में भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार दिए गए अलीमुद्दीन के परिजनों को आज दिन तक मृत्यु प्रमाण्पत्र नही मिल सका है।
अलीमुद्दीन के मृत्यु प्रमाण्पत्र को हासिल करने के लिए पीड़ित परिवार एक वर्ष से सरकारी दफ्तरो के चक्कर लगा रहा है लेकिन उसे मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल नही हो सका है।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में मौत के स्थान को लेकर जानकारी नही दी है। यही कारण है कि मृतक अलीमुद्दीन की मौत कहाँ हुई, यह कॉलम अभी तक भरा नही जा सका है।
हालाँकि अलीमुद्दीन की हत्या से जुड़े तमाम दस्तावेजो से पीड़ित परिवार यह साबित कर सकता है कि अलीमुद्दीन को भीड़ ने पीट पीट कर मार दिया था। इसके लिए पीड़ित परिवार के पास अहम दस्तावेजो में पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट के अलावा पुलिस की वो रिपोर्ट भी है जिसे कोर्ट में पेश किया गया था। इस रिपोर्ट में घटना स्थल का पूरा ज़िक्र है लेकिन अलीमुद्दीन की मौत अस्पताल में हुई या घटना स्थल पर ही हो गयी थी इसे लेकर पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट नही सौंपी है।
अलीमुद्दीन के बेटे शहजाद अंसारी ने मीडिया को बताया कि मृत्यु प्रमाण पत्र न होने के कारण वे बीमा कंपनियों को दावा नही कर पा रहे। उन्होंने कहा कि पिता अलीमुद्दीन की हत्या के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हमे अपनी बहिन की शादी करनी है, हम लगातार पुलिस स्टेशन, उप-मंडल अधिकारी के कार्यालय, उप-कमिश्नर के कार्यालय और रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसिंज में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए गुहार लगा रहे हैं।
बता दें कि झारखण्ड के रामगढ में गौ मांस ले जाने के शक में कारोबारी अलीमुद्दीन की भीड़ द्वारा पीट पीट कर हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में नामजद 12लोगों के ऊपर फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट में आरोप तय किये जा चुके हैं। इनमे एक नाबालिंग भी शामिल है। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 में से 11 आरोपियों को दोषी पाया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
