यूपी में नहीं बना गठबंधन तो इन चेहरों पर दांव लगाएगी कांग्रेस !

यूपी में नहीं बना गठबंधन तो इन चेहरों पर दांव लगाएगी कांग्रेस !

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। 2019 के लोकसभा चुनाव पूर्व यदि उत्तर प्रदेश में गठबंधन की राह आसान नहीं हुई तो कांग्रेस सपा-बसपा के अलावा कुछ अन्य दलों को लेकर चुनावी मैदान में उतर सकती है। इन दलों में शिवपाल सिंह यादव की प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी, शरद यादव की लोकतान्त्रिक जनता दल और अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल शामिल हैं।

वहीँ ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि सपा बसपा गठबंधन में सम्मानजनक सीटें न मिलने की दशा में कांग्रेस कुछ चुनिंदा सीटों पर पूरी ताकत झौंक सकती है।

जानकारों की माने तो कम से कम दो दर्जन सीटें ऐसी हैं जहाँ कांग्रेस अपने बूते अच्छा चुनाव लड़ सकती है। इन सीटों पर पहले चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के सहारे कांग्रेस उत्तर प्रदेश से 15 से 20 सीटें जीतने का हिसाब किताब बना रही है।

इनमे प्रतापगढ़ से रत्ना सिंह, लखीमपुर खीरी की धौहरारा सीट से जितिन प्रसाद, बाराबंकी से पी.एल. पुनिया, कुशीनगर से आर.पी.एन. सिंह, सहारनपुर क्षेत्र से इमरान मसूद, फैजाबाद से निर्मल खत्री और कानपुर से श्रीप्रकाश जयसवाल, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को आगरा या फिरोजाबाद, उन्नाव अन्नू टंडन, झांसी प्रदीप जैन आदित्य आदि शामिल हैं। वहीँ कभी कांग्रेस का परम्परागत गढ़ रहे इलाहाबाद से प्रमोद तिवारी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

इसके अलावा कांग्रेस जल्द ही उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर किसी ज़मीनी नेता को प्रदेश की कमान सौंप सकती है। पार्टी सूत्रों की माने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व किसी ज़मीनी नेता को सौंपा जाए।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक राजबब्बर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। उनकी पहचान एक जुझारू और संघर्षशील नेता की जगह एक सेलिब्रिटी वाली है। इसलिए लोकसभा चुनाव में जाने से पहले प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को आवश्यक माना जा रहा है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट- मुस्लिम कॉम्बिनेशन पर चोट करने के लिए कांग्रेस अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल, शिवपाल की प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी, शरद यादव की लोकतान्त्रिक जनता दल के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से भी गठबंधन करने पर विचार कर रही है।

गौरतलब है कि हाल ही में तेलंगाना के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस यह कह चुकी है कि उसे ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से कोई परहेज नहीं है। इसलिए इस बात की संभावनाएं बढ़ जाती हैं कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानो को पार्टी की तरफ मोड़ने के लिए कांग्रेस एआईएमआईएम के साथ कोई बड़ी सौदेबाज़ी करे।

हालाँकि पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि सपा बसपा गठबंधन में कांग्रेस को 15 से 20 सीटें तक मिल जाती हैं तो वह सपा बसपा गठबंधन के साथ जाना पसंद करेगी लेकिन जैसा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के तेवरों से साफ़ हो गया है कि वह प्रदेश में गठबंधन में कांग्रेस को 5 से 10 सीटों तक ही सीमित रखना चाहते हैं।

सूत्रों ने कहा कि ऐसे हालातो से निटपने के लिए कांग्रेस एक अलग रणनीति पर काम कर रही है। इस रणनीति में कांग्रेस अपने पुराने कद्दावर नेताओ और कुछ नए दलों को गठबंधन में ला सकती है।

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के लिए अगले दो महीने बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव से कम से कम एक महीने पहले अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान करना चाहती हैं। इसलिए समझा जाता है कि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन कोई तस्वीर फरवरी या उससे पहले साफ़ हो जाएगी।

TeamDigital