मोदी सरकार ने अडानी समूह का 200 करोड़ का जुर्माना माफ किया!

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नई दिल्ली । पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान के चलते अडानी समूह पर लगे 200 करोड़ रुपये के जुर्माने को मोदी सरकार ने रद्द कर दिया है । यह जुर्माना अडानी पोर्ट एंड सेज परियोजना के चलते स्थानीय पारिस्थितिकी को हुए बड़े पैमाने पर नुकसान की रिपोर्ट आने के बाद पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय लगाया गया था. पर्यावरण उल्लंघन के मामलों में यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना था ।

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात के मुंदड़ा में अडानी वॉटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए 2009 में जारी पर्यावरण मंजूरी का भी विस्तार कर दिया है. इसके अलावा इस परियोजना पर पूर्ववर्ती सरकार के समय लगाई गई कई सख्त शर्तें भी वापस ले ली गई हैं ।

700 हेक्टेयर जमीन पर बन रहे अडानी वॉटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में चार पोर्ट, कंटेनर टर्मिनल, यार्ड, एक रेल संपर्क के साथ कई अन्य तरह के निर्माण शामिल हैं. यह परियोजना एक और बड़े पोर्ट, विशेष आर्थिक क्षेत्र और टाउनशिप कॉम्पलेक्स का हिस्सा है ।

पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात के मुंदड़ा में अडानी वॉटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए 2009 में जारी पर्यावरण मंजूरी का विस्तार कर दिया है । परियोजना पर पूर्ववर्ती सरकार के समय लगाई गई कई सख्त शर्तें भी वापस ले ली गई हैं ।

2012 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मुंदड़ा प्रोजेक्ट से पर्यावरण को हुए नुकसान के आरोपों की जांच के लिए सुनीता नारायण की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी ।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में नियमों के उल्लंघन, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को हुए व्यापक नुकसान और अवैध तरीके से जमीन लेने जैसी बातों को सामने रखा था । समिति ने पर्यावरण नुकसान की व्यापकता को देखते हुए परियोजना के उत्तरी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाने और क्षतिपूर्ति के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत या 200 करोड़ रुपये, जो भी अधिक हो, वसूलने की सिफारिश की थी ।

2013 में समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए मंत्रालय ने अडानी पोर्ट एंड सेज के साथ-साथ गुजरात के अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा कि इस उल्लंघन के लिए क्यों न प्रोजेक्ट डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए । अडानी पोर्ट एंड सेज ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया था । गुजरात के अधिकारियों ने भी कंपनी का ही पक्ष लिया था ।

कंपनी और गुजरात के अधिकारियों के जवाब की पड़ताल करने के बाद मंत्रालय ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने का अपना मूल फैसला कायम रखा था । इस पर अंतिम फैसला पर्यावरण मंत्री को लेना था लेकिन, यूपीए सरकार में मंत्रियों के फेरबदल (जयंती नटराजन की जगह वीरप्पा मोइली) और बाद में सरकार बदलने के चलते इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया. इसके बाद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सितंबर 2015 में जुर्माने को रद्द कर दिया ।

सूचना का अधिकार कानून के तहत मंत्रालय के 2012 से लेकर 2016 तक के दस्तावेजों को देखने वाले दिल्ली स्थित संगठन सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च से जुड़े कांची कोहली का कहना है कि मंत्रालय के नवनियुक्त अधिकारियों ने अडानी पोर्ट एंड सेज परियोजना में पर्यावरण नुकसान और नियमों के उल्लंघन की पुरानी शिकायतों को पूरी तरह पलट दिया है । अधिकारियों ने कहा है कि सेटेलाइट डेटा से परियोजना के आस-पास मैंग्रोव्स को हुए नुकसान की पुष्टि होती है लेकिन इससे परियोजना को दोषी ठहराने के सबूत नहीं मिलते हैं ।

अधिकारियों के इसी निष्कर्ष को स्वीकार करते हुए जावड़ेकर ने 200 करोड़ रुपये के जुर्माने को खारिज करने का फैसला किया । अभी संबंध में अभी तक पर्यावरण मंत्रालय और अडानी समूह की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है ।

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TeamDigital