मोदी सरकार को नहीं मालुम: कितनी साफ़ हुई गंगा
नई दिल्ली। गंगा की सफाई को लेकर भले ही सरकार के मंत्री तमाम दावे कर रहे हों लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि केंद्र सरकार को नहीं मालूम कि गंगा कितना साफ़ हो चुकी है।
सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत केंद्र सरकार से पूछे गए सवाल के जबाव में सरकार ने जो कुछ कहा उससे पता चलता है कि मोदी सरकार को गंगा की सफाई को लेकर जानकारी नहीं है।
आरटीआई अर्जी के जवाब से खुलासा हुआ कि सरकार गंगा की सफाई पर अब तक 3,800 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। तब सवाल उठता हे कि जमीनी स्तर पर सफाई कहां-कहां हुई? इतनी बड़ी रकम कहां-कहां और किन मदों में खर्च हुई?
समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक आरटीआई याचिकाकर्ता एवं पर्यावरणविद् विक्रम तोगड़ कहते हैं, आरटीआई के तहत यह ब्योरा मांगा गया था कि अब तक गंगा की कितनी सफाई हुई है, लेकिन सरकार इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं करा पाई।
सरकार ने 2020 तक 80 फीसदी गंगा साफ करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन अभी तक कितनी साफ हुई है, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है। 2019 में कितनी गंगा साफ करेंगे इसका हिसाब भी किसी और को नहीं, सरकार को ही देना है।
बता दें कि गुजरात छोड़कर उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के समय इस बात को चढ़बढ़ कर प्रसारित किया गया था कि उन्हें गंगा मैया ने बुलाया है।
इतना ही नहीं गंगा की सफाई के दावों के बीच नमामि गंगे योजना शुरू की गयी और समय समय पर बीजेपी नेताओं ने संसद के बाहर गंगा की सफाई को लेकर बड़े बड़े दावे किये लेकिन गंगा की सफाई का कामकाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों के अनुरूप नहीं होने के चलते नमामि गंगे परियोजना का काम देख रहीं उमा भारती को इस योजना से अलग कर दिया गया।
फिलहाल आरटीआई से जो जानकारी मिली है उसके हिसाब से केंद्र सरकार यह बताने में असमर्थ है कि गंगा की सफाई का काम कितना हो चूका है तथा गंगा के पूरी तरह साफ़ होने में कितना समय और लगेगा।
