मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका है “राइट टू प्राइवेसी”

मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका है “राइट टू प्राइवेसी”

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट द्वारा निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) को लेकर दिए गए फैसले को मोदी सरकार की बड़ी हार माना जा रहा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है। नौ जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है।

इस फैसले को मोदी सरकार की हार इसलिए माना जा रहा है क्यों कि केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा था कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है। अब इस फैसले का सीधा असर आधार कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं के अमल पर होगा। लोगों की निजता से जुड़े डेटा पर कानून बनाते वक्त तर्कपूर्ण रोक के मुद्दे पर विचार करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार की सूचना लीक नहीं कर सकते। निजी सूचना सार्वजनिक करना गलत है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निजता का हनन करने वाली सरकारी नीतियां गलत हैं। ऐसे में कोर्ट के फैसले से आधार कार्ड योजना को बड़ा झटका लगा है।

अब नहीं देना होगा आधार कार्ड!:
सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद अब माना जा रहा है कि किसी भी फोन का सिम खरीदने के लिए आधार जानकारी देना ज़रूरी नहीं होगा। इतना ही नहीं बैंक खातों से आधार कार्ड जोड़ना भी अनिवार्य नहीं रह जायेगा।

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के मुताबिक, अगर रेलवे, एयरलाइन जैसे रिजर्वेशन के लिए जानकारी मांगी जाती है, तो ऐसी स्थिति में नागरिक अपने अधिकार के तहत उससे इनकार कर सकेगा।

किसने क्या कहा :

बीजेपी नेता सुब्रमणयन स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट किया- हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं, अब आधार पर फैसले का इंतजार है।’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- निजता एक मौलिक अधिकार है. जो आजादी हमें 1947 में मिली थी, वो इस फैसले से और भी वृहद हुई है।’

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लगातार निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताने से इनकार कर रही थी।

TeamDigital