मालेगांव ब्लास्ट: कर्नल पुरोहित की याचिका ख़ारिज
मुंबई। मालेगांव ब्लास्ट मामले में मुंबई की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने कर्नल पुरोहित द्वारा दायर की गई उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मालेगांव ब्लास्ट मामले से UAPA को हटाने की मांग की थी।
गौरतलब है कि कर्नल पुरोहित ने एनआईए की विशेष अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा था कि उसके ऊपर से UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज) की धारा को हटा लिया जाये।
याचिका में कर्नल पुरोहित ने दावा किया था कि उसके खिलाफ लगाई गई UAPA की धारा वैध नहीं है। इस धारा को इस केस में गलत तरीके से जोड़ा गया है। जिसकी कोई आवश्यकता नहीं दिखती।
मामले की सुनवाई करते हुए एनआईए की विशेष अदालत ने UAPA की धरा को वैध और आवश्यक मानते हुए कर्नल पुरोहित की याचिका को ख़ारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यूएपीए के तहत सुनवाई सही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी कर्नल पुरोहित की आरोप तय करने पर स्टे की मांग खारिज कर दी थी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी कर्नल पुरोहित की आरोप तय करने पर स्टे की मांग खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मालेगांव ब्लास्ट मामले की एसआईटी से जांच कराने की याचिका पर सुनवाई से ही इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह अपनी इस अर्जी को ट्रायल कोर्ट में ही दाखिल करें। वहीं बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कर्नल पुरोहित एवं अन्य की यह याचिका पहले ही खारिज कर चुका था।
पुरोहित ने निचली अदालत की ओर से आरोप तय किए जाने पर रोक लगाने की मांग की थी। यही नहीं हाई कोर्ट ने कहा कि गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपों पर ट्रायल कोर्ट की ओर से ही फैसला लिया जाएगा। कर्नल श्रीकांत पुरोहित ने वहां भी याचिका में अपने ऊपर लगे गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) को चुनौती दी थी।
बता दें कि कर्नल पुरोहित को बीते साल मालेगांव ब्लास्ट केस में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी। कर्नल पुरोहित पिछले 9 साल से जेल में थे। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए जमानत दी थी। पुरोहित ने शीर्ष अदालत में कहा था कि एटीएस द्वारा साजिश के तहत फंसाया गया है।
