पद्मावती, पाटीदार और प्रचार, इनसे जटिल हुई बीजेपी की राह
अहमदाबाद। गुजरात में होने जा रहे विधानसभा चुनावो में एक के बाद एक नई मुश्किल झेल रही बीजेपी की राह अब और अधिक पेचीदा होती दिख रही है। पाटीदार, पद्मावती और प्रचार, ये तीन मामले ऐसे हैं जिन पर बीजेपी बैकफुट पर आती दिख रही है।
पाटीदार अनामत समिति(पास) की कांग्रेस से डील लगभग फाइनल हो चुकी है और आज किसी भी समय हार्दिक पटेल कांग्रेस के पक्ष में कोई बड़ा एलान कर सकते हैं। बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद अभी भी पाटीदार पटेलों का एक बड़ा हिस्सा खासकर युवा पाटीदार मतदाता बीजेपी के हाथ से खिसक चुका हैं। ऐसे में बीजेपी द्वारा पाटीदारो को बीजेपी से फिर से जोड़ने के प्रयास फेल हो रहे हैं।
पाटीदार समुदाय से जुड़े लोगों की माने तो पास नेता हार्दिक पटेल की सीडी वायरल होने के बाद अब पाटीदार मानने लगे हैं कि इस सब षड्यंत्र के पीछे बीजेपी नेताओं का हाथ है। बीजेपी नेताओं की सोच के विपरीत सीडी वायरल होने के बाद पाटीदारो में हार्दिक पटेल को लेकर सहानुभूति बढ़ी हैं।
वहीँ दूसरी तरफ फिल्म पद्मावती को लेकर गुजरात के राजपूतो में खासा रोष है। राजपूत समुदाय फिल्म पद्मावती को लेकर पहले ही कह चूका है कि यदि फिल्म से विवादित दृश्य नहीं हटाए गए तो वे चुनाव में बीजेपी को सबक सिखाएंगे। ज़मीनी हकीकत देखें तो राजपूत समुदाय के लोग अब इस बात को मानने लगे हैं कि पद्मावती फिल्म को रोकने के लिए बीजेपी की तरफ से ठोस प्रयास नहीं किये जा रहे।
बीजेपी की राह जटिल होने का एक बड़ा कारण उसका चुनावी प्रचार भी है। कांग्रेस के विज्ञापन “विकास पागल हो गया” के जबाव में बीजेपी द्वारा जारी किया गया “मैं हूँ विकास” बहुत नहीं चल सका कि कांग्रेस ने एक और विज्ञापन जारी कर बीजेपी को कटघरे में खड़ा कर दिया।
अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल किये गए एक वीडियो से भी बीजेपी का दांव उल्टा पड़ गया है। वायरल वीडियो में एक युवती को खौफ से चलते दिखाया गया है और साथ में अज़ान की आवाज़ भी आ रही है। इस वायरल वीडियो के माध्यम से यह कहने की कोशिश की गयी है कि यदि गुजरात में बीजेपी की सरकार नहीं बनी तो राज्य की महिलाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी। वीडियो में साफ़ इशारा मुसलमानो को लेकर है।
हिन्दू मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयासों के तहत वायरल किये गए इस वीडियो के बाद आम जनता में नकारात्मक सन्देश गया है। हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण की जगह लोग इसे यह कह कर शेयर कर रहे हैं कि वोटो की खातिर बीजेपी खौफ फैला रही है।
वहीँ गुजरात की जनता में इस बात को लेकर भी चर्चा जोरो पर है कि सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी किसी भी हद तक जा सकती है। हालाँकि इस वीडियो को तुरंत रोकने के लिए कुछ मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इसकी जांच पड़ताल करके और इसे रोकने की मांग की है।
बीजेपी के लिए एक और नई मुश्किल टिकिट वितरण को लेकर पैदा हुए बागियों को लेकर है। बीजेपी द्वारा जारी किये गए उम्मीदवारों के नाम को लेकर कई जनपदों में विरोध शुरू हो गया है। जानकारों की माने तो इस बार चुनाव में बीजेपी पर एक मानसिक दबाव है और उस दबाव से बाहर निकलने के प्रयासों के तहत बीजेपी जो भी कदम उठा रही है वे सभी उसके लिए नकरात्मक परिणाम ला रहे हैं।
