दो बार ठुकरा चुकी थीं ऑफर, प्रियंका के मनाने पर राजी हुईं शीला दीक्षित

लखनऊ। 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहने वाली शीला दीक्षित को कांग्रेस ने अगले साल होने वाले चुनावों में उनकी ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। हालांकि इस अनुभवी नेता को इसके लिए तैयार करना आसान नहीं था।
शीला दीक्षित ने इस ऑफर को दो बार ठुकरा दिया था लेकिन इसके बाद उन्हें राजी करने के लिए राजीव शुक्ला और गुलामनबी आजाद के साथ प्रियंका गांधी को आगे आना पड़ा।
शीला दीक्षित का नाम तब सामने आया जब कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने मार्च में गहन बैठक की थी। उत्तर प्रदेश में पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने प्रतिद्वंदी दलों द्वारा ‘उपेक्षित’ 9 प्रतिशत ब्राह्मण वोट को मजबूत करने की जरूरत को लेकर आवाज उठाई और उस समुदाय से मुख्यमंत्री के चेहरे का सुझाव दिया।
बंद कमरे में हुई लंबी बैठकों के बाद जब विभिन्न आधारों पर जितिन प्रसाद, राजेश मिश्रा और प्रमोद तिवारी के नाम खारिज हुए तब पार्टी ने शीला दीक्षित को जिम्मेदारी देने का फैसला किया लेकिन शीला दीक्षित ने अनिच्छा व्यक्ति की थी। शुक्ला और आजाद ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन वे तभी राजी हुई जब प्रियंका गांधी ने उन्हें आगे आने के लिए कहा।
कांग्रेस नेताओं ने दीक्षित के कद और अनुभव को देखते हुए यूपी कैम्पेन का नेतृत्व करने और मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए सही विकल्प माना । पंजाब में जन्म शीला की शादी कांग्रेस नेता उमा शंकर दीक्षित के बेटे विनोदी दीक्षित से हुई थी। शीला का ससुराल यूपी में है और इसके ही मद्देनजर कांग्रेस ने उन्हें अपना सीएम कैंडिडेट बनाया। शीला दीक्षित दिल्ली का सीएम बनने से पहले 1984 से 1989 तक उत्तर प्रदेश के कन्नौज से सांसद रही हैं।
