दलित संतों के साथ डुबकी लगाने की चाहत पर अमित शाह को साधुओं की फटकार

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नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सिंहस्थ मेले में दलित समुदाय के संतों के साथ डुबकी लगाने के फैसले को साधुओं ने राजनीतिक कवायद करार दी है। शाह ने 11 मई को दलित समुदाय के संतों के साथ डुबकी लगाने का फैसला किया है।

बुधवार को मीडिया से बात करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरी ने कहा, ‘साधुओं में जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। कुंभ में सभी एक साथ स्नान करते हैं।

अमित शाह को साधुओं की सेवा करने आना चाहिए, न कि राजनीति करने।’ भाजपा ने घोषणा की थी कि शाह 11 मई को वाल्मीकी आश्रम में संतों से मुलाकात करेंगे। वहां से वे महास्नान के लिए रामघाट तक निकालने जाने वाले जुलूस में हिस्सा लेंगे। इससे पहले वे दलितों और उनके समुदाय के साधुओं के साथ भोज करेंगे।

मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और थावर चंद गहलोत सहित राज्य के सभी सांसद और विधायकों के भी इस दौरान वहां मौजूद होने की संभावना है। अन्य संत उमेशनाथ महाराज ने कहा कि शाह को सामाजिक सौहार्द्ध के इस अभियान को केवल सिंहस्थ तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें इस अभियान को बाद में भी जारी रखना चाहिए।

एक दिन पहले ही द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने ‘सामाजिक सौहार्द्ध डुबकी’ की आलोचना करते हुए कहा था कि यह जातिओं के बीच मतभेद बढ़ाएगी। सात ही उन्होंने कहा था कि मेले में दलितों को डुबकी लेने से किसी ने नहीं रोका है।

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