तीन तलाक: सरकार के बिल पर ओवैसी ने जतायी ये आपत्तियां
नई दिल्ली। तीन तलाक पर सजा के प्रावधान वाले सरकार के बिल पर संसद में आल इंडिया मस्ज्लिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ने कई आपत्तियां जताई हैं।
ओवैसी के मुताबिक इस्लाम में तलाक ए बिद्दत पहले से गैरकानूनी है। वहीं देश में घरेलू हिंसी के खिलाफ कानून पहले से ही मौजूद है। ऐसी स्थिति में किसी नए कानून की देश में जरूरत नहीं है।
ओवैसी के मुताबिक केन्द्र सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक पर लाया गया बिल संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकारों के हनन में है।
ओवैसी ने कहा कि सरकार का बिल कानूनी तौर पर लचर है. ओवैसी के मुताबिक बिल में कई प्रावधान ऐसे हैं तो मौजूदा कुछ कानून के साथ तर्कसंगत नहीं हैं।
ओवैसी के मुताबिक संसद को इस मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार महज इसलिए नहीं मिल जाता कही मूल अधिकारों का हनन हो रहा है।
ओवैसी के मुताबिक ट्रिपल तलाक पर कोई नया कानून का प्रस्ताव संसद में पेश करने से पहले केन्द्र सरकार को जनता के बीच मुद्दे पर बहस कराने की जरूरत है।
ओवैसी ने कहा कि सायरा बानों मामले में संबंधित पार्टी ने तलाक-ए-बिद्दत के अपराधीकरण किए जाने का विरोध किया है।
ओवैसी ने कहा कि देश में घरेलू हिंसा एक्ट 2005 महिलाओं को पहले से वह संरक्षण दे रहा है जो सरकार के इस नए प्रस्तावित कानून के जरिए दिया जाना है। मौजूदा एक्ट के तहत महिलाओं को मेंटेनेन्स, कस्टडी और कंम्पनशेषन का अधिकार पहले से मौजूद है लिहाजा किसी नए कानून की जरूरत नहीं है।
ओवैसी के मुताबिक प्रस्तावित कानून में मुस्लिम पुरुष को जेल में डालने का प्रावधान किया गया है वहीं जेल में रहने के दौरान उसके शादी को जायज भी रखा गया है।
