तीन तलाक बिल पर कांग्रेस और विपक्ष की मांग: सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए बिल

तीन तलाक बिल पर कांग्रेस और विपक्ष की मांग: सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए बिल

नई दिल्ली। तीन तलाक बिल पर लोकसभा में दो बजे के बाद शुरू हुई चर्चा में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने भाग लेते हुए कहा कि तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। यह बिल जस का तस पास होने लायक नहीं हैं। इसमें अभी संशोधनों की गुंजाईश हैं।

वहीँ सरकार का कहना है कि यह बिल किसी भी समुदाय, धर्म या विश्वास का विरोध नहीं करता है। यह बिल महिलाओं के अधिकार और उनके न्याय के लिए है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस्लामिक देशो का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के अधिकतर इस्लामिक देशो में तीन तलाक पर पाबन्दी है।

दोपहर 2 बजे सत्र शुरु होने के बाद लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि तीन तलाक बिल बहुत जरूरी बिल है और इस बिल के ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। क्योंकि सरकार किसी धार्मिक मामले में हस्तक्षेप कर रही है। खड़गे ने कहा कि इस बिल से करोड़ों महिलाएं प्रभावित होंगी और उनकी रक्षा जरूरी है। कांग्रेस, टीएमसी समेत कई अन्य दलों के सांसद तीन तलाक बिल को ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग कर रहे हैं।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक बिल किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को सम्मान देने से जुड़ा है और कांग्रेस पहले इस बिल पर चर्चा के लिए तैयार थी। प्रसाद ने कहा कि जब दिसंबर में बिल लाए थे तब भी बिल लोकसभा में पास हुआ था, लेकिन राज्यसभा से लौट गया था। विपक्ष की कई सिफारिशों के मुताबिक बिल में बदलाव भी किए गए हैं और पीड़ित महिला के अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित किए गए हैं।

तीन तलाक को दंडात्मक अपराध घोषित करने वाला यह विधेयक गत 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। यह तीन तलाक से संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और अमान्य होगा तथा इसके लिए तीन साल तक की सजा हो सकती है। कुछ दलों के विरोध के मद्देनजर सरकार ने जमानत के प्रावधान सहित कुछ संशोधनों को मंजूरी प्रदान की थी ताकि राजनीतिक दलों में विधेयक को लेकर स्वीकार्यकता बढ़ सके।

पहला संशोधन

पहले- इस मामले में पहले कोई भी केस दर्ज करा सकता था। साथ ही पुलिस संज्ञान लेकर मामला दर्ज कर सकती थी।

अब- अब पीड़िता, सगे रिश्तेदार ही केस दर्ज करा सकेंगे।

दूसरा संशोधन

पहले- पहले गैर जमानती अपराध और संज्ञेय अपराध था. पुलिस बिना वॉरंट के गिरफ्तार कर सकती थी।

अब- मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा।

तीसरा संशोधन

पहले- पहले समझौते का कोई प्रावधान नहीं था।

अब- संशोधन के बाद-मजिस्ट्रेट के सामने पति-पत्नी में समझौते का विकल्प भी खुला रहेगा।

इससे पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा। सरकार इसे गुरुवार को ही लोकसभा से पारित कर अगले सप्ताह राज्यसभा में पेश करना चाहती है। सरकार को उम्मीद है कि यह बिल इस सत्र में राज्यसभा से पास हो जाएगा।

चर्चा से पहले राफेल डील को लेकर हंगामा:

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्यों ने राफेल डील की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग की। प्रश्नकाल के दौरान हंगामा होता रहा। हंगामे के चलते कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सदन में इस पर सहमति बनी थी कि 27 दिसंबर को विधेयक पर चर्चा होगी।

इससे पहले कांग्रेस ने इस पर सहमति जताई थी कि वह ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018’ पर होने वाली चर्चा में भाग लेगी। सरकार इस विधेयक को पिछले हफ्ते पास कराना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा राफेल सौदे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच समेत अन्य मांगों को लेकर हुए हंगामे के चलते बिल पर चर्चा नहीं हो सकी थी।

TeamDigital