अमित शाह और येदुरप्पा की चालो पर भारी पड़े गहलोत और आज़ाद के दांव

अमित शाह और येदुरप्पा की चालो पर भारी पड़े गहलोत और आज़ाद के दांव

नई दिल्ली। कर्नाटक में ढाई दिन से चल रही रस्साकशी का आज अंत हो गया। तमाम कोशिशो के बावजूद येदुरप्पा अपने लिए आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रहे और उन्हें अंत में घुटने टेकने पड़े।

15मई को परिणाम आने बाद ही कर्नाटक में सियासी उठापटक शुरू हो गयी थी लेकिन जिस तरह के बयान बीजेपी नेताओं की तरफ से लगातार आ रहे थे, उससे ज़ाहिर हो रहा था कि बड़े स्तर पर होर्स ट्रेंडिंग का खेल भी हो सकता है।

चुनाव परिणाम आने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लगातार ये दावे आते रहे कि उनके पास सरकार बनाने के लिए ज़रूरी समर्थन मौजूद है। हालाँकि बीजेपी नेता किसी भी कांग्रेस या जेडीएस विधायक का नाम लेने से अंतिम समय तक कतराते दिखे।

चुनाव परिणाम आते ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने दूत के तौर पर प्रभारी महासचिव अशोक गहलोत और राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलामनबी आज़ाद को कर्नाटक रवाना कर दिया था।

कर्नाटक पहुँचने के बाद गहलोत और आज़ाद की जोड़ी ने उस अहम कड़ी को ढूंड निकाला जिस आधार पर बीजेपी नेता अपना बहुमत साबित करने के दावे कर रहे थे।

इसके बाद गुलामनबी आज़ाद और अशोक गहलोत ने कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया और वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडके से साथ बैठक की। इस बैठक में तय किया गया कि कर्नाटक की लड़ाई को सुप्रीमकोर्ट से लेकर सडक तक हर जगह लड़ा जायेगा।

इसलिए जैसे ही रात 9 बजे राज्यपाल ने येदुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया, तुरंत ही कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में बैठे कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी को इसकी जानकारी दी और उन्हें किसी भी हाल में इस मामले को सुप्रीमकोर्ट में उठाने का लिए कहा।

राज्यपाल ने येदुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए पन्द्रह दिनों का समय दिया था। इसलिए कांग्रेस नेताओं को यह भांपते देर न लगी कि पन्द्रह दिनों में बड़े स्तर पर विधायको को खेमा बदलने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इसलिए दिल्ली में बैठे कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से विचार विमर्श किया और इस मामले को लेकर सुप्रीमकोर्ट पहुँच गए।

पूरी रात सुनवाई चलने के बाद सुप्रीमकोर्ट से कांग्रेस को एक बड़ी सफलता मिली। तथा अगले दिन हुई सुनवाई में येदुरप्पा को बहुमत सिद्ध करने के लिए मिले पन्द्रह दिनों का समय घटाकर शनिवार को 4 बजे तक बहुमत सिद्ध करने के आदेश जारी किये गए।

असल में यहीं से बीजेपी की रणनीति की कमर टूट गयी। इसके बाद कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और गुलाम नबी आज़ाद ने एक बार फिर कर्नाटक के नेताओं के साथ बैठक की और फैसला लिए कि विधायको को बेंगलुरु से हैदराबाद शिफ्ट कर दिया जाए।

सूत्रों की माने तो विधायको से सम्पर्क स्थापित करने की बीजेपी नेताओं और स्वयं येदुरप्पा की तमाम कोशिशें नाकाम हो गयीं और अंत में येदुरप्पा को घुटने टेकने पड़े।

TeamDigital