कांग्रेस ने उत्तराखंड के बाद अरुणाचल में भी बीजेपी को ऐसे चटाई धूल

sonia-gandhi-IIC

नई दिल्ली । उत्तराखंड में भाजपा को अंत में शर्मिंदा होना पड़ा । अब यही हाल अरुणाचल में ही हुआ । उत्तराखंड के बाद भाजपा के डियासि दावों को समझ चुकी कांग्रेस ने अरुणाचल में भाजपा के चक्रव्यूह जो तोड़ते हुए उसे ऐसे मात दी कि भाजपा के रणनीतिकार चकरा गए ।

जनसत्ता के अनुसार कांग्रेस ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश में बागी विधायकों को वापस पार्टी में मिलाकर महीनों पुराने तख्‍तापलट को नाकाम कर दिया। छह महीने पहले ये विधायक कलिखो पुल की अगुआई में पार्टी छोड़कर चले गए। इसकी वजह से नवाम तुकी की सरकार गिर गई। हालांकि, अगर सूत्रों का भरोसा किया जाए तो कांग्रेस को इस कोशिश में रातोंरात कामयाबी नहीं मिली। वह बागी विधायकों लेकर बीते डेढ़ महीने से काम कर रही थी। सूत्रों ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले राज्‍य के कांग्रेसी नेताओं को इस बात का एहसास हुआ कि कलिखो पुल के खेमे में सब कुछ सही नहीं है।

पेमा खांडू और पुल के कैबिनेट में डिप्‍टी सीएम चौना मीन दोनों ही नाखुश थे। ये नाराजगी पुल के कथित ‘तानाशाही भरे तरीके’ और उनके फैसलों को लेकर थी। दुर्भाग्‍यवश उन्‍होंने ऐसे ही आरोप तुकी के खिलाफ भी लगाए थे। कांग्रेसी नेता खास तौर पर अरुणाचल ईस्‍ट के सांसद निनॉन्‍ग एरिंग ने तुरंत इन नाराज नेताओं से संपर्क साधा। उस वक्‍त सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कहीं अता पता नहीं था। यह संदेश तुरंत कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी को दिया गया।

सोनिया ने बागी खेमे से मोलतोल से खुद को दूर रखा। इसके बाद राज्‍य के नेताओं और कांग्रेस प्रभारी ने इस नाजुक हालात को संभाला। अनौपचारिक बातचीत करीब एक महीने तक चली। कई तरह की अफवाहें फैलीं लेकिन खांडू और मीन ने बयान जारी करके कहा कि सब कुछ ठीक है। कांग्रेस के मध्‍यस्‍थों ने उन दोनों से कहा कि दोनों की पसंद से ही उनमें में से कोई एक कांग्रेसी सरकार का सीएम होगा। इस बातचीत में और तेजी उस वक्‍त आ गई, जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया।

सुप्रीम कोर्ट में तुकी के वकील सीनियर कांग्रेसी लीडर कपिल सिब्‍बल ने तुकी को मनाया कि पार्टी के हित में उन्‍हें किसी दूसरे के लिए रास्‍ता खाली करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस योजना के बारे में तुकी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले ही दिन बता दिया गया। वह राजी हो गए। कांग्रेसी सांसद एरिंग और अन्‍य मीन के के संपर्क में रहे। कांग्रेस के लिए अप्रत्‍याशित यह बात रही कि विद्रोहियों ने खुद से ही खांडू को अपना नेता चुन लिया।

पार्टी के एक सीनियर नेता ने कहा, ‘यह फैसला उनके बीच से ही आया। और वे बागी नहीं हैं। वे सभी कांग्रेसी हैं।’ शुक्रवार सुबह यह प्रस्‍ताव सोनिया गांधी के पास पहुंचा, जिसे उन्‍होंने मंजूरी दे दी। यह संदेश बागी खेमे तक पहुंचाया गया जो गुवाहाटी से ईटानगर शाम को ही पहुंच गए। पूरी रात कांग्रेसी नेता बेचैन थे। वे जानते थे कि बीजेपी जवाबी हमला कर सकती है। हालांकि, सारी चीजें कांग्रेस के तयशुदा स्‍क्र‍िप्‍ट के मुताबिक ही हुईं और सभी विधायकों ने बैठक कर खांडू को अपना नेता चुन लिया।

TeamDigital