शहज़ाद पूनावाला की सुप्रीमकोर्ट में याचिका : गौरक्षा के नाम पर आतंक फैला रहे लोगों पर लगे पाबंदी
नई दिल्ली। जब से केंद्र में मोदी सरकार सत्ता मे आई हैं, देश में गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितो पर अत्याचार बढ़ते जा रहे। पिछले साल गौ रक्षा के नाम पर दादरी के बिसाहड़ा गाँव में अखलाक की निर्मम हत्या के बाद शुरू हुई गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी की एक के बाद एक बहुत सी घटनाएँ समाने आती रही हैं ।
इसी बीच कांग्रेस के सीनियर नेता और महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव शहजाद पुनावाला और समाजिक कार्यकर्ता तहसीन पुनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई करते हुए जांच के आदेश दिए।
जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अमिताव राय के बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि मामले की आगे भी सुनाई की जाएगी और कोर्ट उन सभी घटनाओं को जांच करेगी जो कि अलग अलग प्रदेशों में हो रही है। केंद्र की सरकार और उन राज्यों की सभी छह सरकारों को वकील नियुक्त करके याचिका पर जबाव देने का आदेश दिया। माननीय कोर्ट ने अगली सुनवाई 7 नवंबर को रखा है।
मालूम हो कि याचिकाकर्ता शहजाद पुनावाला और तहसीन पुनावाला ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों पर चल रहे हमलों को रोका जाए। और गौ के नाम पर आतंक फैला रहे संगठनों पर पाबंदी लगाई जाए ठीक उसी तरह जैसे ISISI और SIMI पर पाबंदी है। याचिका में यह भी कहा गया था कि कुछ राज्यों में कानूनी संरक्षण मिल रहा है, उसे बंद किया जाए।
शहज़ाद पूनावाला ने पहले भी समाज को जोड़ने मे हमेशा पहल की हैं । शहजाद पुनावाल चाहते हैं केंद्र की गृहमंत्रालय गौरक्षा के नाम पर आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाए ।
