लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा जारी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रखा सरकार का पक्ष
नई दिल्ली। आज ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा में सरकार का पक्ष रखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि इस युद्द को DGMO वार्ता के बाद रोका गया।
उन्होंने कहा कि इस मिशन के दौरान भारतीय सेना को कोई भी नुकसान नहीं हुआ। राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि पाकिस्तान एक भी टारगेट हिट नहीं कर पाया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा, “जब अटल जी प्रधानमंत्री थे तब पाकिस्तान के साथ कंपोजिट डायलॉग के लिए भारत की शर्त थी कि पाकिस्तान अपनी जमीन का प्रयोग भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए नहीं करेगा, जिसे पाकिस्तान ने भी मान लिया था। लेकिन दुर्भाग्य से 2009 में शर्म-अल-शेख(समझौते) में तत्कालीन सरकार ने एक बड़ी भूल की।
उन्होंने कहा कि जब कंपोजिट डायलॉग प्रोसेस से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अलग कर दिया गया। यानी बातचीत जारी रखने के लिए पाकिस्तान द्वारा अपनी जमीन को आतंकवाद के लिए प्रयोग ना करने की शर्त को ही खत्म कर दिया गया। मैं मानता हूं यह भारत की रणनीतिक निर्धारण को कमजोर कर देने वाला कदम था।
रक्षा मंत्री ने सदन में कहा कि “आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई केवल सीमा पर नहीं है बल्कि वैचारिक मोर्चों पर भी लड़ी जा रही है। इसी उद्देशय से प्रधानमंत्री ने कई प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया था जिसमें हमारे अधिकांश पार्टी के सांसद शामिल थे। सचमुच इस समूह ने वैश्विक मंचों पर जाकर भारत की बात बहुत प्रभावी तरीके से रखी और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन को उन्होंने मजबूत किया। मैं उन सभी सम्मानित सदस्यों के प्रति शीश झुकाकर आभार व्यक्त करना चाहता हूं।”
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर हमारे सामर्थ्य का प्रतीक था जिसमें हमने दिखाया कि अगर कोई हमारे नागरिकों को मारेगा तो भारत चुप नहीं बैठेगा। हमारा राजनैतिक तंत्र और नेतृत्व बिना किसी दबाव के काम करेगा। हमारी मिसाइलें भौतिक सीमाओं को पार करेंगी, वीर सैनिक दुश्मन की कमर तोड़ देंगे। हम आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
वहीँ इससे पहले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “ऐसा लगता है कि सरकार ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा नहीं चाहती… हमें बोलने नहीं दिया जा रहा और फिर हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं। हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में हिस्सा लेना चाहते हैं, लेकिन आपने देखा कि किसी भी विपक्षी सदस्य ने तख्तियां नहीं उठाईं और न ही सदन के वेल में प्रवेश किया। इसके बाद भी सदन स्थगित कर दिया गया… इसे शुरू होने दीजिए, हम तैयार हैं।”
