मोदी सरकार पर गंभीर आरोप: 10 दिन पहले बनी कंपनी को SAIL से मिला गया 750 करोड़ का ऑर्डर
नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने कहा है कि मोदी सरकार में भ्रष्टाचार का अमृतकाल चल रहा है। दस दिन पहले बनी कंपनी को स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAIL) से 750 करोड़ का ऑर्डर मिलने पर पार्टी ने गंभीर सवाल दागे हैं।
कांग्रेस नेता अजय कुमार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) ने अवसंरचना परियोजनाओं के लिए निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 100 कंपनियों को 11 लाख टन इस्पात रियायती दरों पर बेचा, जिसे इन कंपनियों ने बाद में अधिक कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाया।
उन्होंने यह दावा भी किया कि 10 दिन पुरानी एक कंपनी को 750 करोड़ रुपये का ऑर्डर दे दिया गया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह मोदी सरकार में ‘भ्रष्टाचार का अमृतकाल’ है।
डॉ अजय कुमार ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘सेल ने अवसंरचना परियोजनाओं के लिए निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 100 कंपनियों को 11 लाख टन स्टील रियायती दरों पर बेचा, जिसे इन कंपनियों ने बाद में अधिक कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सेल में महाप्रबंधक पद पर कार्यरत एक ईमानदार अधिकारी राजीव भाटिया ने 10 दिन पुरानी ‘वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा 400-800 करोड़ रुपये का घोटाला करने का खुलासा किया था। लेकिन बिना किसी कारण के उन्हें 10 महीने तक निलंबित रखा गया। बाद में उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए मजबूर किया गया।’’
कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सेल का नियम है कि- इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए वह सस्ते में स्टील देती है। एक मध्य वर्ग के परिवार के सदस्य राजीव भाटिया सेल में जीएम बने, ताकि वह देश की सेवा कर सकें। उन्होंने देखा कि सेल को कई कंपनियां चूना लगा रही हैं। सेल ने सस्ते दाम में 11 लाख टन स्टील 100 कंपनियों को बेच दिया। ये 100 कंपनी उस स्टील को खरीद कर बेच देती है। एक उदाहरण देखिएः ‘वेंकटेश इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी है, जो 1 अक्टूबर 2020 को बनाई जाती है। यही कंपनी 12 अक्टूबर 2020 को डेढ़ लाख टन के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करती है। सिर्फ 10 दिन पहले बनी कंपनी को 750 करोड़ रुपए का ठेका दे दिया जाता है। इस कंपनी की पैरवी एक दूसरी कंपनी करती है, जो सितंबर में ही सेल को एक चिट्ठी भेज देती है कि हमने वेंकटेश इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ बहुत काम किया है। यह मोदी जी का ‘अमृत काल’ है।
जमशेदपुर के पूर्व सांसद अजय कुमार ने दावा किया कि घोटाले के उजागर करने वाले राजीव भाटिया ने दो बार नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी, लेकिन राजीव भाटिया को सस्पेंड कर दिया गया।
इतना ही नहीं, राजीव भाटिया के वीआरएस में लिखा गया कि वे करप्शन में संलिप्त हैं। यानी- जिसने बताया कि किन लोगों ने घोटाले को अंजाम दिया गया, उसे ही करप्ट बता दिया गया। फिर जब राजीव भाटिया ने सीवीसी को चिट्ठी लिखी तो उन्होंने जांच शुरू की। इस जांच के बाद 26 लोगों को निलंबित किया गया, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद इन सभी को वापस उन्हीं पदों पर बैठा दिया गया।
