वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
नई दिल्ली। वक्फ कानून में संशोधन के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है।
कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई का काम आज पूरा कर लिया। हालांकि कोर्ट ने आज कोई फैसला नहीं सुनाया और अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है।
आज कोर्ट में सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं।
वहीं सॉलिसिटर जनरल की दलीलों के जवाब में याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलीलें पेश की।
सिब्बल ने कहा कि यह प्रावधान असंवैधानिक है। जांच की कोई समय सीमा तय नहीं है। इसमें 6 महीना या इससे अधिक भी लग सकता है, तब तक मुस्लिम समाज का उस प्रॉपर्टी से अधिकार खत्म हो जाएगा। वह संपत्ति वक्फ की है या नहीं, इसके निर्धारण की कोई प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं है। सरकार को ही निर्धारण करना है, निर्धारित होने के बाद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव भी किया जा सकता है। निर्धारण की प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। यह पूर्णतया मनमाना है।
वहीं इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वक्फ एक इस्लामिक कॉन्सेप्ट है, इस पर कोई विवाद नहीं है। 1923, 1954, 1995 के कानूनों में यह प्रावधान था कि कोई भी व्यक्ति वक्फ प्रॉपर्टी को पंजीकृत करा सकता था। इसके लिए किसी कागजात की जरूरत नहीं थी। 2025 एक्ट में वक्फ रजिस्ट्रेशन के लिए दस्तावेज का प्रावधान किया गया है। यह गलत नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि जिस वक्फ प्रॉपर्टी का पेपर नहीं होगा, वो ले ली जाएगी।
