सीज फायर के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली। भारत पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहे तनाव और सैन्य कार्यवाही के बीच दोनों देशों के बीच युद्ध विराम पर बनी सहमति को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
विपक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति के उस ट्वीट पर सवाल खड़े कर रहा है जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के युद्ध विराम पर सहमत होने का खुलासा किया था।
विपक्ष का सवाल है कि युद्ध विराम का ऐलान अमेरिका की तरफ से हो रहा है, इसका मतलब क्या भारत ने युद्ध विराम का फैसला अमेरिका के दबाव में लिया है?
वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए सोशल मीडिया पर कई सवाल उठाए हैं।
भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम के बाद भी देश के कई जिलों में कल पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। इसी कारण कई शहरों में ब्लैकआउट भी किया गया।
हालांकि अभी सरकार ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। कल रात विदेश सचिव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि सीज फायर के ऐलान के बाद पाकिस्तान इसका उल्लंघन कर रहा है। हमारे देश की सेना को किसी भी गतिविधि पर नजर रखने और कड़ा जवाब देने के आदेश दिए गए हैं।
विपक्ष ने क्या कहा:
शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत को किसी भी देश के हस्तक्षेप के बिना इस चुनौती का सामना करना होगा। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा, “कश्मीर मुद्दे का समाधान खोजने के लिए हमें अमेरिका या किसी अन्य देश के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। नियति ने हमें यह जिम्मेदारी दी है और भारत को इस चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए।”
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “पाकिस्तान एक दुष्ट देश है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह हमेशा भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहता है और आतंकवादियों का समर्थन करता है। यह वही पाकिस्तान है, जहां अमेरिका ने घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था… कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि संसद का सत्र बुलाया जाए और प्रधानमंत्री विपक्ष और संसद को पूरी घटना के बारे में बताएं और यह भी बताएं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने किस तरह युद्ध विराम की घोषणा की और अमेरिका किस तरह भारत और पाकिस्तान को समानांतर रखकर बात कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री कहते हैं कि दोनों देश तटस्थ स्थान पर मिलेंगे। क्या इसका मतलब यह है कि शिमला समझौता रद्द हो गया है? अमेरिकी राष्ट्रपति कह रहे हैं कि मैं कश्मीर मामले में मध्यस्थता करूंगा। लेकिन, कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हम किसी को भी इसमें हस्तक्षेप करने की इजाजत नहीं देंगे। प्रधानमंत्री और भाजपा को बताना चाहिए कि अमेरिका हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप क्यों कर रहा है।”
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, “इस ट्वीट पर भी कई सवाल उठेंगे… तो क्या हुआ (भारत-पाकिस्तान समझौते को लेकर), कैसे और क्यों, इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है… इसलिए हम आज कोई आलोचना नहीं करेंगे। हम सिर्फ़ इतना चाहते हैं कि संसद का विशेष सत्र हो और सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। मैं सभी राजनीतिक दलों से अपील करना चाहता हूं कि जब तक सरकार उन्हें भरोसा न दिला दे कि प्रधानमंत्री भी बैठक में मौजूद रहेंगे, तब तक वे बैठक में शामिल न हों। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर आज डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होते तो वे सर्वदलीय बैठक में मौजूद होते और विशेष सत्र भी बुलाया जाता।”
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, “हम पीड़ित थे, और हमने यह सुनिश्चित करते हुए सटीक निशाना लगाया कि कोई नागरिक हताहत न हो, और 9 आतंकी स्थलों पर हमला किया। लेकिन हमने अपने लोगों, अधिकारियों को खो दिया। यह दो सेनाओं के बीच का अंतर है – भारत की एक पेशेवर सेना और एक दुष्ट देश पाकिस्तान की सेना। लेकिन, हमारी ब्रीफिंग से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध विराम की घोषणा की, जो शिमला समझौते के अनुसार भी सही नहीं है। सरकार ने इस दावे का खंडन करने की कोशिश की और कहा कि ऐसा कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ था। लेकिन, पूरी दुनिया के तथाकथित ‘सरपंच’ द्वारा किया गया यह प्रयास हमारे जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छा नहीं है।”
