किसानो ने कसी कमर, 10 मई के बाद ज़ोर पकड़ेगा किसान आंदोलन

किसानो ने कसी कमर, 10 मई के बाद ज़ोर पकड़ेगा किसान आंदोलन

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले चार महीने से अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन पर सरकार की बेरुखी को देखते हुए किसान संगठनों ने 10 मई से आंदोलन और तेज करने का फैसला लिया है। अब किसान आंदोलन में बड़ी तादाद में महिलाओं, बेरोज़गारो और श्रमिकों को भी शामिल किया जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि, “आंदोलन अभी आठ महीने और चलाना पड़ेगा. किसान को आंदोलन तो करना ही पड़ेगा, अगर आंदोलन नहीं होगा तो किसानों की जमीन जाएगी। किसान 10 मई तक अपनी गेंहू की फसल काट लेंगे, उसके बाद आंदोलन तेजी पकड़ेगा।”

किसान आंदोलन को तेज करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने कई बड़े एलान किये हैं। किसान नेताओं ने 10 अप्रैल को 24 घंटे के लिए कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे को अवरुद्ध करने की भी घोषणा की। इतना ही नहीं सरकार को संकेत देने के लिए 10 अप्रैल को केएमपी एक्सप्रेसवे को 24 घंटे के लिए अवरुद्ध करेंगे, जो कि 10 अप्रैल को पूर्वान्ह्र 11 बजे से अगले दिन पूर्वान्ह्र 11 बजे तक होगा।

इसके अलावा पांच अप्रैल को एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) बचाओ दिवस आयोजित किया जायेगा और इसके तहत देशभर के एफसीआई कार्यालयों का घेराव किया जायेगा। 14 अप्रैल को भीम राव आंबेडकर जयंती को किसान संविधान बचाओ दिवस के रूप में मनाएंगे। वहीँ किसान एक मई को श्रमिक दिवस भी आयोजित करेंगे।

बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में किसान पंचायतो के आयोजन का एलान कर चुके संयुक्त किसान मोर्चे ने मई में संसद मार्च का भी एलान किया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, इसमें न केवल किसानों को, बल्कि बल्कि महिलाओं, बेरोजगार व्यक्तियों और श्रमिकों को भी शामिल किया जाएगा जो आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

चढूनी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मार्च शांतिपूर्ण ढंग से निकाला जायेगा और इस बात का विशेष ध्यान रखा जायेगा कि 26 जनवरी को जो घटना हुई थी, उसकी पुनरावृत्ति नहीं हो।

TeamDigital