फतवा : पत्नी भी दे सकती है तलाक, ये हैं शर्तें

बरेली । सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के बाद अब वॉट्सएप और फोन पर तलाक के बढ़ते मामलों के बीच बरेली में दरगाह आला हजरत के मुफ्तियों ने लोगों के सामने तलाक की नई परिभाषा रखी है। शरीयत में तलाक का अधिकार सिर्फ पति को है, लेकिन नई परिभाषा में साफ किया गया है कि पत्नी भी अपने पति को कुछ शर्तो के साथ तलाक दे सकती है। इन शर्तो में किसी ठोस आधार पर पत्नी भी अपने पति को तलाक दे सकेगी।

दरगाह ने साफ किया है कि सिर्फ शौहर ही अपनी बीवी को तलाक नहीं दे सकता, बल्कि एक बीवी भी अपने शौहर को तलाक देकर उससे अलग हो सकती है। ऐसे तलाक के लिए बीवी को तफवीज-ए-तलाक यानि शौहर से तलाक देने का अधिकार हासिल करना होगा।

तफवीज-ए-तलाक के मायने यह हैं कि निकाह के वक़्त या शादीशुदा जिंदगी के दौरान एक शौहर अपनी बीवी को यह अधिकार दे दे कि अगर कभी वह चाहे तो मुझे यानि शौहर को तलाक देकर अलग हो सकती है। इस तफवीज-ए-तलाक का मजमून मियां-बीवी को किसी आलिम या मुफ्ती से तैयार कराना पड़ेगा साथ ही इसकी एक समय सीमा भी तय होगी कि कितने दिन, महीने या साल के लिए तलाक का मजमून तैयार किया गया है। उसी दौराने वक्त ही यह तलाक जायज मानी जाएगी। समय निकलने के बाद तलाक का मतलब अपने आप ही खत्म हो जाएगा।

गौरतलब है कि मैनचेस्टर में रहने वाले मुहम्मद मसूद अहमद भी बेटी की शादी से पहले दरगाह से यही सवाल पूछ चुके हैं। इस पर मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी का कहना कि यूरोप में ज्यादातर मुसलमान बेटी, बहन की शादी “तफवीज-ए-तलाक” का हक लेकर ही करते हैं, क्योंकि वहां शादियां जल्द टूट जाती हैं।

वहीँ देवबंद से जुड़े जमीतुल उलमा के जिला सदर मुफ्ती मोहम्मद मियां कासमी ने भी तफवीज-ए-तलाक पर सहमति जताई है। उनका कहना है कि शरियत में इसकी इजाजत है, अगर शौहर अपनी बीवी को तलाक लेने की इजाजत दे दे तो शरअन जायज है। ऐसे में औरत हजबे इजाजत अपने ऊपर तलाक दे सकती है।

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