शुक्रवार को फिर होंगी किसानो और सरकार के बीच वार्ता, कृषि कानून और MSP पर अटकी है बात
नई दिल्ली। कृषि कानूनो के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के 43वे दिन शुक्रवार को किसानो और सरकार के बीच 8वीं बार बैठक होगी। अब तक हुई बैठकों में सिर्फ दो मुद्दों पर ही सहमति बन पाई है। जबकि कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी गारंटी के लिए कानून बनाने जैसी किसानो की अहम मांगे अभी भी जस की तस खड़ी हैं।
किसानो का कहना है कि सरकार उनकी मुख्य मांगो को टालती आ रही है और अब जब भी सरकार से बात होगी तो कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी गारंटी के लिए कानून बनाये जाने के मुद्दे पर ही बात होगी।
इससे पहले किसानो ने बुधवार को अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। वहीँ गुरुवार को किसानो ने ट्रेक्टर मार्च कर सरकार को अपनी ताकत दिखा दी है। आंदोलन को तेज करने की कवायद के तहत देशभर में जनजागरण अभियान शुरू किया गया है। यह जन जागरण दो सप्ताह तक चलेगा। वहीँ 13 जनवरी को किसान आंदोलन स्थल पर ही कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी का पर्व मनाएंगे।
किसानो का कहना है कि वे 18 जनवरी को महिला किसान दिवस तथा 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद में “आजाद हिंद किसान दिवस” मनाएंगे। इसके अलावा किसानो ने देश के सभी प्रदेशो की राजधानियों में राज्यपाल के निवास के बाहर किसान डेरा डालने का एलान भी किया है।
26 जनवरी को परेड निकालेंगे किसान:
आंदोलनकारी किसानो ने एलान किया है कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का अवसर पर परेड का आयोजन करेंगे। गुरुवार को ट्रेक्टर मार्च के बाद भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आज हमारे किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर ट्रेनिंग ली ताकि 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर रैली की परेड निकाली जा सके। 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर और टैंक एकसाथ चलेंगे। ट्रैक्टर 2 लाइन में चलेंगे और टैंक एक लाइन में चलेगा।
गलतफहमी में न रहे सरकार: राजद
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद मनोज झा ने कहा कि सरकार अगर सोचती है किसान आंदोलन को थाका कर ख़त्म कर दिया जाएगा तो मैं समझता हूं कि यह गलतफहमी उन्हें नहीं पालनी चाहिए। मुझे डर है कि अगर किसान आंदोलन का हल नहीं किया गया तो आनेवाले दिनों में क्या होगा कल्पना से परे है।
फिलहाल सभी की नज़रें शुक्रवार को होने वाली किसानो और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत पट टिकी हैं। देखना है कि आठवें दौर की बातचीत में सरकार और किसानो के बीच सहमति बन पाती है अथवा नहीं।
