Live: किसानो ने सरकार के प्रस्ताव को ख़ारिज किया
नई दिल्ली। कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े किसान संगठनों को सरकार की तरफ से भेजा गया लिखित प्रस्ताव मिल गया है और अब इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सिंघु बॉर्डर पर किसानो की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में 32 किसान यूनियनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार की तरफ से भेजे गए लिखित मसौदे में सरकार की तरफ से किसानो की मांगो के संदर्भ में कुछ लचीला रुख दिखाया गया है। इस मसौदे में एमएसपी के लिए अलग से कानून लाये जाने का आश्वासन दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार की तरफ से दिए गए लिखित मसौदे में मंडी एक्ट में बदलाव और किसानो से जुडी शिकायतों के लिए फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट के स्थापना का भरोसा दिलाया गया है।
खबर लिखे जाने तक दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसान संगठनों की बैठक जारी है। इस बैठक में सरकार द्वारा भेजे गए मसौदे के अहम बिंदुओं पर एक एक कर चर्चा की जा रही है।
हालांकि सरकार ने लिखित मसौदे में किसानो को क्या ऑफर किया है, इसके बारे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर दो बजे प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया को जानकारी देंगे। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मसौदे में कृषि कानूनों को वापस लेने का कोई ज़िक्र नहीं हैं, हालाँकि कुछ आवश्यक संशोधनों और नए प्रावधानों की बात कही गई है।
किसानो को मंजूर नहीं सरकार का प्रस्ताव:
इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान वापस नहीं जाएगा, अब किसान के मान-सम्मान का सवाल है। सरकार कानून वापस नहीं लेगी, तानाशाही होगी? अगर सरकार हठधर्मी पर है तो किसान की भी हठ है। ये पूरे देश के किसानों का सवाल है।
इससे पहले कल रात किसान यूनियनो के नेताओं और गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई बैठक भी बिना नतीजा खत्म हो गई थी। गृह मंत्री अमित शाह ने कृषि कानूनों को वापस लेने के प्रस्ताव से इंकार कर दिया था। हालांकि संशोधनों को लेकर उन्होंने कहा कि कल सरकार की तरफ से किसानो को लिखित प्रस्ताव दिया जायेगा।
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हनन मुला ने बताया कि कल बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार आज सुबह 11 बजे तक लिखकर भेजेगी(प्रस्ताव), 12 बजे सिंघु बॉर्डर पर हमारी बैठक है। सरकार ने 10 दिसंबर को बैठक के लिए बोला है, अगर प्रस्ताव के बाद कुछ सकारात्मक निकल कर आता है तो कल बैठक हो सकती है।
