संजय राउत की बीजेपी को खरी खरी, धार्मिक स्थल खुलना हिंदुत्व की जीत नहीं, बीजेपी श्रेय न ले
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार से धार्मिक स्थल खोले जाने के आदेश जारी करते हुए गाइडलाइन जारी की है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए उद्धव सरकार ने गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराये जाने का आदेश दिया है।
गाइडलाइन के मुताबिक 65 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं, दस साल से कम उम्र के बच्चे और वैसे व्यक्ति जिनको कोई अन्य बीमारी हो, उन्हें फिलहाल घर पर ही रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा धार्मिक स्थलों के अंदर दो व्यक्तियों के बीच की दूरी कम से कम छह फीट रखने तथा मास्क का प्रयोग करना या चेहरे को कवर करना अनिवार्यता से लागू किया गया है।
गाइडलाइन के मुताबिक धार्मिक स्थलों पर एंट्री गेट पर हैंड सैनिटाइजर और स्क्रीनिंग की व्यवस्था करनी होगी. किसी भी व्यक्ति को परिसर में बिना मास्क पहने घुसने नहीं दिया जाएगा।
इतना ही नहीं लोगों को जागरुक करने के लिए ऑडियो और विजु्अल मीडियम से लोगों को जागरुक करने की व्यवस्था होगी तथा सभी आगंतुकों को अपने चप्पल जूते अपनी गाड़ी के अंदर ही रखने को कहा गया है या फिर एक सेपरेट स्लॉट में रखना होगा।
महाराष्ट्र सरकार के धार्मिक स्थलों को खोलने के फैसले पर बीजेपी ने इसे हिंदुत्व की जीत बताया है। वहीँ बीजेपी पर पलटवार करते हुए शिवसेना ने कहा कि धार्मिक स्थलों को बंद करने का निर्णय प्रधानमंत्री के आदेश पर ही लिया गया था।
संजय राउत ने मीडिया से यह बात तब कही जब उनसे यह पूछा गया कि कि क्या भाजपा विधायक राम कदम का यह कहना सही है कि उद्धव ठाकरे की सरकार ने विपक्षी दलों के दबाव में मंदिरों को खोलने का फैसला किया है?
बीजेपी की तरफ से आई प्रतिक्रिया पर जबाव देते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने सभी धार्मिक स्थल को खोलने का निर्णय लिया और सभी नियमों का पालन करने कहा है।अगर किसी को लगता है कि ये हिंदुत्व की जीत है तो ये फैसला प्रधानमंत्री जी के आदेश पर ही लिया गया था। मुझे लगता है प्रधानमंत्री को एक बैठक कर सबको बताना चाहिए कि हार या जीत क्या होती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को दोबारा खोले जाने का फैसला किया है, इसे हिंदुत्व से जोड़े जाने का कोई तुक नहीं है और ना ही इसकी कोई जरूरत है। यह मामला लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है इसका हिंदुत्व से कोई संबंध नहीं।
