कोरोना काल में कैसे हो चुनाव प्रचार? चुनाव आयोग ने पार्टियों से मांगे सुझाव

कोरोना काल में कैसे हो चुनाव प्रचार? चुनाव आयोग ने पार्टियों से मांगे सुझाव

नई दिल्ली। इस वर्ष नवंबर में बिहार के विधानसभा चुनाव तथा मध्य प्रदेश में होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग की सबसे बड़ी दिक्क्त कोरोना महामारी के दौरान चुनाव प्रचार और जनसभाओं को लेकर है।

वहीँ उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में पंचायत के चुनाव भी होने हैं। देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए फिलहाल यह भी तय नहीं किया जा सकता कि चुनाव कराये जाने के लिए अनुकूल समय कौन सा रहेगा।

ऐसे में चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय राजनैतिक दलों, क्षेत्रीय दलों से सुझाव मांगे हैं। चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान पार्टियों से इलेक्शन कैंपेन और सार्वजनिक बैठकें आयोजित करने को लेकर अपने विचार और सुझाव भेजने को कहा है। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 31 जुलाई तय की गई है।

गौरतलब है कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और लोकजनशक्ति पार्टी कोरोना महामारी के दौरान राज्य में विधानसभा चुनाव कराये जाने के पक्ष में नहीं हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव के लिए लोगों की जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। उनका कहना है कि नीतीश सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर देना चाहिए।

वहीँ लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और सांसद चिराग पासवान भी कोरोना महामारी के बीच बिहार में विधानसभा चुनाव कराये जाने के खिलाफ अपनी राय रख चुके हैं।

हालांकि अभी हाल ही में चुनाव आयोग ने 80 वर्ष से ऊपर की उम्र वालो के लिए बैलेट पेपर के इस्तेमाल तथा एक बूथ पर एक हज़ार से अधिक मतदाताओं को न रखने की बात कही थी लेकिन अहम सवाल चुनाव प्रचार और जनसभाओं को लेकर है।

इससे पहले बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने डिजिल रैली कराये जाने के सुझाव को ख़ारिज कर दिया था। विपक्षी दलों का कहना था कि वर्चुअल रैली के आयोजन का खर्च सभी दल नहीं उठा सकते।

TeamDigital