राहुल की प्रवासी मजदूरो से मुलाकात का वीडियो जारी, ‘कोरोना नहीं भूख से मरने का डर’
नई दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों प्रवासी मजदूरों के साथ हुई अपनी मुलाक़ात का वीडियो जारी किया है। एक डॉक्यूमेंट्री के तौर पर जारी इस वीडियो में प्रवासी मजदूर यह कहते दिख रहे हैं कि उन्हें कोरोना से नहीं भूख प्यास से मरने का डर है।
इस वीडियो में राहुल गांधी से बातचीत में प्रवासी मजदूरों ने मोदी सरकार द्वारा अचानक लागू किये गए लॉकडाउन को लेकर सवाल उठाये हैं। इतना ही नहीं प्रवासी मजदूरों ने कहा कि वे अब वापस हरियाणा नहीं आएंगे।
वीडियो में प्रवासी मजदूरों ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष से बातचीत में अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि सरकार कहती है कि कोई मकान का किराया नहीं लेगा, बिजली का बिल नहीं देना होगा लेकिन मकान मालिक किराया भी ले रहे हैं और बिजली का बिल भी।
प्रवासी मजदूरों ने कहा कि यदि सरकार साफ़ साफ़ कह देती कि लॉकडाउन इतने दिनों तक चलेगा तो हम पहले ही घर चले जाए और इस तरह दर दर की ठोकरें न खानी पड़तीं। एक प्रवासी मजदूर ने कहा कि सरकार को लॉकडाउन करने से पहले कम से कम 4 दिनों का समय देना चाहिए था, जिससे हर प्रवासी मजदूर जिसे घर जाना होता वह वापस चला जाता।
राहुल गांधी से बातचीत में प्रवासी मजदूरों ने मोदी सरकार इस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने प्रवासी मजदूरों के बैंक खाते में पांच पांच सौ रुपए डाले हैं।
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प्रवासी मजदूरों से जब इस संदर्भ में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि किसी प्रवासी मजदूर के खाते में एक रूपया भी नहीं डाला गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रवासी मजदूरों से यह भी पूछा कि उन्हें सरकार से क्या उम्मीदें हैं, कैसे उनकी मदद की जा सकती है।
इस सवाल के जबाव में प्रवासी मजदूरों ने हाथजोड़कर कहा कि उन्हें घर पहुँचाया जाए और अब वे वापस हरियाणा नहीं जाएंगे। प्रवासी मजदूरों में एक महिला ने कहा कि हमे किसी भी तरह घर पहुंचा दिया जाए, ये बड़ा अहसान होगा।
महिला ने भावुक होते हुए राहुल से कहा कि गांव पहुंचा दीजिए हम लोगों को. हम लोगों को वापस हरियाणा मत पहुंचाना। हमको गांव जाना है। मजदूरों ने बताया कि हरियाणा में जहां रहते थे वहां 5-5 हजार रुपये का सामना छूट गया। अब तो वो वापस आने से रहा।
राहुल ने पूछा कि सरकार अगर मदद कर सके तो उसे क्या करनी चाहिए, आप सुझाव दें। इस पर लोगों ने कहा कि जो लोग गांव जाना चाहें उन्हें गांव जाने दिया जाए। साथ ही रोजगार शुरू हो जाए।
