पंजाब में शहीद का दर्ज़ा प्राप्त सरबजीत विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड में तस्कर

नई दिल्ली । सालों तक पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में कष्ट झेलने वाले भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की मौत के बाद पंजाब सरकार ने भले ही उन्हें शहीद का दर्जा दे दिया हो, लेकिन विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड में वह आज भी एक छोटा तस्कर है. इसका खुलासा विदेश मंत्रालय से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से हुआ है ।
सरबजीत सिंह को लेकर भठिंडा के एक कारोबारी हरमिलाप ग्रेवाल द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह नया खुलासा हुआ है । केंद्र की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि सरबजीत ने भारतीय वाणिज्य दूतावास से कहा था कि वह छोटा सा तस्कर था. हालांकि, सूचना में यह कहीं भी स्पष्ट नहीं है कि वह किस तरह की तस्करी में शामिल था ।
इंडियम एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया है कि 30 अगस्त 2005 को पाकिस्तान सरकार ने दूतावास संबंधी सुविधा मुहैया कराई थी, जिसमें सरबजीत सिंह ने यह खुलासा किया था कि वह आजीविका के लिए छोटी-मोटी तस्करी करते थे. एक बार ऐसी ही यात्रा के दौरान उसे 29-30 अगस्त 1990 की रात को कसूर सीमा के पास पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया था ।
आरटीआर्इ की यह कॉपी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर वायरल हो गई है. इसके बाद कई यूजर्स सरबजीत को शहीद का दर्जा देने पर सवाल उठा रहे हैं । गौरतलब है कि पंजाब के तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव के रहने वाले सरबजीत सिंह 1990 में गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान में पहुंच गए थे ।
जहां उन्हें पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया था. खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट बताते हुए उन्हें लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद बम धमाकों का आरोपी बनाया गया ।
अक्टूबर 1991 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई । उनकी रिहाई की कोशिशें चल ही रहीं थी कि लाहौर की कोट लखपत जेल में मारपीट के बाद उन्हें घायलावस्था में जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 मई 2013 को उनका निधन हो गया ।
पंजाब में शहीद का दर्ज़ा प्राप्त सरबजीत विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड में तस्कर
नई दिल्ली । सालों तक पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में कष्ट झेलने वाले भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की मौत के बाद पंजाब सरकार ने भले ही उन्हें शहीद का दर्जा दे दिया हो, लेकिन विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड में वह आज भी एक छोटा तस्कर है. इसका खुलासा विदेश मंत्रालय से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से हुआ है ।
सरबजीत सिंह को लेकर भठिंडा के एक कारोबारी हरमिलाप ग्रेवाल द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह नया खुलासा हुआ है । केंद्र की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि सरबजीत ने भारतीय वाणिज्य दूतावास से कहा था कि वह छोटा सा तस्कर था. हालांकि, सूचना में यह कहीं भी स्पष्ट नहीं है कि वह किस तरह की तस्करी में शामिल था ।
इंडियम एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया है कि 30 अगस्त 2005 को पाकिस्तान सरकार ने दूतावास संबंधी सुविधा मुहैया कराई थी, जिसमें सरबजीत सिंह ने यह खुलासा किया था कि वह आजीविका के लिए छोटी-मोटी तस्करी करते थे. एक बार ऐसी ही यात्रा के दौरान उसे 29-30 अगस्त 1990 की रात को कसूर सीमा के पास पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया था ।
आरटीआर्इ की यह कॉपी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर वायरल हो गई है. इसके बाद कई यूजर्स सरबजीत को शहीद का दर्जा देने पर सवाल उठा रहे हैं । गौरतलब है कि पंजाब के तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव के रहने वाले सरबजीत सिंह 1990 में गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान में पहुंच गए थे ।
जहां उन्हें पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया था. खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट बताते हुए उन्हें लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद बम धमाकों का आरोपी बनाया गया ।
अक्टूबर 1991 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई । उनकी रिहाई की कोशिशें चल ही रहीं थी कि लाहौर की कोट लखपत जेल में मारपीट के बाद उन्हें घायलावस्था में जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 मई 2013 को उनका निधन हो गया ।
