सैकड़ो प्रवासी मजदूर बांद्रा स्टेशन पहुंचे, घर वापस जाने की ज़िद्द
मुंबई ब्यूरो। देश में लागू किये गए लॉकडाउन के बीच मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर सैकड़ो प्रवासी मजदूर जमा हुए। प्रवासी मजदूर अपने अपने घरो को वापस भेजे जाने की मांग कर रहे हैं।
इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ते देख पुलिस को हलका लाठी चार्ज कर भीड़ को तितर बितर करने की कोशिश की गई लेकिन पिछले 20 दिनों से मुंबई में फंसे प्रवासी मजदूर अपनी मांग पर अड़े रहे।
इस बीच कई स्थानीय नेताओं ने भी प्रवासी मजदूरों को मनाने की कोशिशों के तहत प्रवासी मजदूरों से बात करने की कोशिश की लेकिन ये प्रयास भी विफल हो गया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने बांद्रा में जुटे हज़ारो मजदूरों की घटना को केंद्र सरकार की नाकामी बताया है।
उन्होंने ट्वीट कर कहा ‘बांद्रा स्टेशन की मौजूदा स्थिति, जिसे अब तितर-बितर कर दिया गया है या सूरत में मजदूरों द्वारा दंगा किया जाना केंद्र सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों के लिए घर वापस जाने के रास्ते की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं होने का एक परिणाम है। वे भोजन या आश्रय नहीं चाहते, वे घर वापस जाना चाहते हैं।’
आदित्य ठाकरे ने कहा कि ‘जिस दिन ट्रेनों को बंद किया गया, उसी दिन राज्य ने ट्रेनों को 24 घंटे और चलाने का अनुरोध किया था, ताकि प्रवासी श्रमिक घर वापस जा सकें।’
गौरतलब है कि देश में लॉकडाउन की अवधि बढाकर 3 मई कर दिया गया है। महाराष्ट्र में देश के सबसे ज़्यादा कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं और प्रतिदिन मरीजों की तादाद बढ़ रही है।
इससे पहले भी 25 मार्च को हुए लॉकडाउन के बाद दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे पर प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। कई प्रवासी श्रमिक पैदल ही घर जाने को मजबूर हो गए। जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से दिल्ली-यूपी सीमा से राज्य के भिन्न-भिन्न जिलों के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी।
इससे पहले 12 मार्च को विश्व बैंक ने कहा था कि घर लौट रहे प्रवासी मजदूर अप्रभावित राज्यों एवं गांवों में कोरोना वायरस फैलाने के कारक बन सकते हैं। देश के जिन इलाकों में ये लोग लौट रहे हैं वहां भी कोविड-19 के मामले सामने आ सकते हैं।
