ट्रेन बंद होने के बाद सैकड़ो किलोमीटर तक पैदल चलने निकल पड़े ये लोग

ट्रेन बंद होने के बाद सैकड़ो किलोमीटर तक पैदल चलने निकल पड़े ये लोग

नई दिल्ली। दिल्ली में अन्य राज्यों से आकर मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों के लिए टोटल लॉक डाउन की खबर किसी बड़े कहर से कम नहीं थी। भवन निर्माण काम बंद और फैक्ट्रियां बंद होने से ठेकेदार और फैक्ट्री मालिकों ने उन्हें निकाल दिया। ऐसे में सबसे बड़ी दिक्क्त आजीविका चलाने की थी।

चूँकि टोटल लॉक डाउन के एलान के बाद भारतीय रेलवे ने सभी यात्री ट्रेनों को स्थगित रखने की तारीख भी 31 मार्च से बढाकर 14 अप्रेल कर दी। 22 मार्च से एक एक दिन कर इधर उधर समय बिताने वाले परिवारों के लिए यात्री ट्रेनों को 14 अप्रेल तक रद्द किये जाने की खबर उन्हें असहाय कर देने वाली थी।

एक तरफ परिवार को लेकर रुकने का कोई स्थाई ठिकाना नहीं था दूसरी तरफ प्रतिदिन के खर्चे से जेब खाली होने के कगार पर पहुँच गई थी। ऐसे में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के कई परिवार अपने गावो को वापस जाने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं।

चूँकि न बसें चल रही हैं और न ही ट्रेन, ऐसे में पैदल चलने के अलावा कोई और रास्ता भी उन्हें नज़र नहीं आ रही। बिहार के सीतामणी के पास की रहने वाली लक्ष्मी अपने परिवार के साथ पैदल ही एक हज़ार किलोमीटर का सफर करने की हिम्मत दिखा रही हैं। उनके साथ 7 साल की एक बेटी और 13 साल का एक बेटा भी है।

लक्ष्मी के पति एक ठेकेदार के कहने पर बिहार से दिल्ली मजदूरी का काम करने आये थे। कोरोना वायरस के चलते जब दिल्ली में टोटल लॉक डाउन का एलान हुआ तो ठेकेदार ने भवन निर्माण कार्य बंद किये जाने का हवाला देते हुए लक्ष्मी और उनके पति को काम से हटाने की बात कही। इतना ही नहीं लक्ष्मी और उनके परिवार को भवन निर्माण की साइट पर दिया गया अस्थाई टिन शेड भी उनसे खाली करा लिया गया।

ऐसी स्थति में इस परिवार ने कुछ दिन दिल्ली के एक रेन बसेरा में काटे, लेकिन जब यह साफ़ हो गया कि अब 14 अप्रेल तक कोई यात्री ट्रेन नहीं चलेगी और न ही 14 अप्रेल तक उन्हें दिल्ली में कोई मजदूरी मिलेगी, तो इस परिवार का धैर्य जबाव देने लगा और लक्ष्मी और उसके पति ने पैदल ही सीतामणी तक जाने का फैसला लिया।

अपने घरो को वापस लौटने वालो में सिर्फ लक्ष्मी का परिवार ही नहीं है। दिल्ली में टोटल लॉक डाउन होने के बाद अन्य राज्यों के सैकड़ो लोग बेरोज़गार होने के बाद प्रतिदिन पैदल ही अपने अपने इलाको की तरफ चल पड़े हैं।

अभी भी दिल्ली में सैकड़ो परिवार फंसे हुए हैं। ऐसे ही कुछ परिवारों ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से गुहार लगाते हुए कहा कि ‘लॉक डाउन के बीच दिल्ली में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर-हम लोग गरीब हैं, चार-पांच बच्चे हैं। हमें न तो मजदूरी मिल रही है न खाना मिल रहा है न पानी। हमारी मदद कीजिए। गाड़ी भिजवा दें तो घर चले जाएंगे। एक मजदूर-हम लोग कोरोना बीमारी से पहले भूख से मर जाएंगे।’

TeamDigital