मनमोहन सिंह की सरकार को नसीहत, कहा ‘एकपक्षीय’ रवैया संघीय राजनीति के लिए ठीक नहीं’

मनमोहन सिंह की सरकार को नसीहत, कहा ‘एकपक्षीय’ रवैया संघीय राजनीति के लिए ठीक नहीं’

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा 15वे वित्त आयोग के विषय और शर्तो में बदलाव किये जाने पर पूर्व प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने एक बार फिर मोदी सरकार को नसीहत दी है।

गौरतलब है कि केंद्र द्वारा 15वें वित्त आयोग को राज्यों के बीच राशि के बंटवारे का आधार 1971 के बजाय 2011 की जनसंख्या को बनाने के लिए कहा गया है। 15वें वित्त आयोग का गठन 27 नवंबर 2017 को किया गया था। इसे अपनी सिफारिशें 30 अक्तूबर 2019 तक देनी हैं। अब इसे बढ़ाकर 30 नवंबर 2019 कर दिया गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने कहा कि एकपक्षीय सोच संघीय नीति एवं सहकारी संघवाद के लिए ठीक नहीं है। दिल्ली में एक राष्ट्रीय परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘सरकार वित्त आयोग के विचारणीय विषय व शर्तों में फेरबदल करना भी चाहती थी तो अच्छा तरीका यही होता कि उस पर ‘राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन’ का समर्थन ले लिया जाता। यह सम्मेलन अब नीति आयोग के तत्वावधान में होता है।’

डा सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं करने से यह संदेश जाएगा कि धन के आवंटन के मामले में केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों को छीनना चाहती है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हम अपने देश की जिस संघीय नीति और सहकारी संघवाद की कसमें खाते हैं, यह उसके लिए ठीक नहीं है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, आयोग की रिपोर्ट वित्त मंत्रालय जाती है और उसके बाद इसे मंत्रिमंडल को भेजा जाता है । ऐसे में मौजूदा सरकार को यह देखना चाहिए कि वह राज्यों के आयोगों पर एकपक्षीय तरीके से अपना दृष्टिकोण थोपने के बजाय संसद का जो भी आदेश हो उसका पालन करे।

डा मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मैं सभी प्राधिकरणों से सम्मान के साथ यह निवेदन करता हूं कि वे अभी भी इस संबंध में किसी विवाद की स्थिति में मुख्यमंत्रियों के सुझावों पर गौर करें।’ उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद में परस्पर समझौते करने की जरूरत होती है। अत: यह महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार राज्यों की बात सुने और उन्हें साथ-साथ लेकर चले।

TeamDigital