अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए डा मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को पढ़ाया पाठ

अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए डा मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को पढ़ाया पाठ

नई दिल्ली। देश की कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को कई सुझाव दिए हैं। साथ ही डा मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को नसीहत भी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाये तो हालात और भी बिगड़ेंगे।

डा मनमोहन सिंह ने देश में आयी आर्थिक मंदी के लिए एक बार फिर नोटबंदी और जीएसटी को बड़ा कारण बताया। एक इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को पहला काम यह करना चाहिए कि वह इस सच को स्वीकार करे कि देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है।

डा सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था को चुस्त दरुस्त करने के लिए मोदी सरकार को पांच उपाए भी सुझाये। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को हेडलाइन प्रबंधन की अपनी आदत से बहार निकलना चाहिए। इस पर सरकार पहले ही काफी समय नष्ट कर चुकी है।

डा मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत चिंताजनक आर्थिक मंदी के दौर में है। पिछली तिमाही की 5 फीसदी जीडीपी विकास दर 6 सालों में सबसे कम है। नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ भी 15 साल के निचले स्तर पर है।

देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में आयी मंदी से बढ़ी बेरोज़गारी की बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि साढ़े 3 लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। मानेसर, पिंपरी-चिंचवड़ और चेन्नई जैसे ऑटोमोटिव हबों से लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। अधिक चिंता ट्रक उत्पादन में मंदी से है, जो माल और आवश्यक वस्तुओं की धीमी मांग का स्पष्ट संकेत है।

उन्होंने आगे कहा कि 2017-18 में बेरोजगारी 45 साल के उच्च स्तर पर रही। आर्थिक विकास बढ़ाने का विश्वसनीय इंजन रही खपत, 18 महीने के निचले स्तर तक पहुंच गई है। बिस्कुट के 5 रुपए के पैकेट की बिक्री में गिरावट ने सारी कहानी खुद बयां कर दी हैा। उपभोक्ता ऋण की सीमित उपलब्धता और घरेलू बचत में गिरावट से खपत भी प्रभावित होती है।

डा मनमोहन सिंह ने सुझाये ये 5 उपाय:

1.. जीएसटी में सुधार करने की अवश्यकता है। सरकार को लम्बी अवधी का सोच कर प्लान बनाना होगा भले ही तत्काल टैक्स उगाही में कुछ कमी भी क्यों न हो।

2.किसानों के हालत में सुधार के उन्हें मुफ्त बाजार उपलब्ध कराना होगा ताकि किसानो के पास पैसे आ सकें। कांग्रेस मेनिफेस्टो में इसका जिक्र भी है।

3. पूजी निर्माण के लिए पर्याप्त कर्ज की व्यवस्था करनी होगी। मंदी के दौर में खपत की कमी होने से बाजार में पूंजी का आभाव भी हो जाता है। सरकार को कर्ज व्यवस्था आसान करना होगा ताकि बाजार में पूंजी पर्याप्त हो।

4.एमएसएमइ सेक्टर को कर्ज मुहैय्या कराना होगा। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स , कपडा आदि उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इन्हे आसानी से कर्ज उपलब्ध हो ताकि ये सेक्टर फिर से काम कर सकें। यही वो सेक्टर हैं जहाँ से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

5. विश्व में चल रहे अमेरिकी और चीन के ट्रेड वार को ध्यान में रख कर अपने निर्यात के स्थानों को पहचानना होगा।

TeamDigital