‘योगी सरकार का ये कैसा रामराज’ कई वर्षों से पंचायत भवन में रहने को मजबूर है गीता का परिवार
ब्यूरो (राम मिश्रा,अमेठी) : पुरानी बीपीएल सूची में नाम नहीं..आवास के लिए पात्रता भी है लेकिन प्रधानमंत्री आवास नहीं मिला। ऐसे में मजबूर परिवार ने गांव के पंचायत घर को ही अपना आशियाना बना लिया। सबको इस परिवार की मजबूरी पर तरस तो आता है लेकिन अभी तक मजबूर परिवार को छत नहीं नसीब हुई। इसका जबाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।
दरअसल, ये मामला अमेठी जिले के मुसफिरखाना विकास खण्ड के ग्राम पंचायत पलिया चन्दापुर का है। जहाँ गाँव में बने पंचायतघर में वर्षों से गुजर बसर कर रहे परिवार का दर्द बिलकुल जुदा है। अपनों ने ही जब उसके घर संपत्ति पर कब्ज़ा कर परिवार को बेघर कर दिया, तो मजबूर परिवार आखिर कहाँ जाए?
मजबूरीवश पंचायतघर को ही अपना आशियाना बना लेनी वाली गीता पत्नी उदयराज का कहना है कि उनके पटीदार ने उसके घर पर कब्ज़ा कर अपना पक्का मकान बना लिया और उसे बेघर कर दिया गांव की पंचायत के बाद भी जब बात नहीं बनी तो पहले खुले आसमान के नीचे पति और दुधमुहे बच्चे अमरनाथ के साथ गुजारा करना शुरू किया।
जब छत को कोई इंतजाम नहीं हुआ तो गीता के परिवार ने थकहार कर पंचायतघर को ही अपना घर बना लिया।आज भी हर आने जाने वाले से गीता और उसके पति उदयराज अपने लिए आवास का जुगाड़ करने की दरख्वास्त करती है। बेसहारा परिवार का कहना है कि मजदूरी करके पेट तो पाल लेते हैं लेकिन आवास बना पाना उसकी कूबत में नहीं है।
वही गीता से जब सूबे के योगी सरकार के ‘रामराज’ के बारे में पूछा गया तो उसने तपाक से जबाब दिया, कैसा रामराज ! कौन सी योगी सरकार ! हमारा परिवार तो वर्षो से पंचायत भवन में रहने को मजबूर है ।
इनका कहना है –
परिवार का नाम बीपीएल सूची में न होने से उसे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास नहीं मिल पा रहा है। हालांकि उसका नाम भेजा गया है लेकिन जब तक आवास नहीं मिलता तब तक बेसहारा परिवार को पंचायतघर से हटा पाना मानवीय दृष्टिकोण से संभव नहीं हो पा रहा है।
रघुनाथ यादव (प्रधान-पलिया चंदापुर)
