50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के मिलान की मांग वाली याचिका ख़ारिज
नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने विपक्षी दलों द्वारा दायर की गयी ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान को लेकर पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज कर दिया है। इस याचिका को कांग्रेस, टीडीपी, टीएमसी सहित 21 दलों ने संयुक्त रूप से दायर किया था।
इस याचिका में सुप्रीमकोर्ट से मांग की गयी थी कि 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों की ईवीएम से मिलान का आदेश चुनाव आयोग को दिया जाए। याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अदालत इस मामले को बार-बार क्यों सुने। सीजेआई ने कहा कि वह इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करना चाहते हैं।
इससे पहले 8 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने हर विधानसभा क्षेत्र में 5 बूथ के ईवीएम को वीवीपैट की पर्ची से मिलाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम को वीवीपैट की पर्ची से मिलाने के अपने इस आदेश में एक से बढ़ाकर पांच कर दिया था।
विपक्षी पार्टियों की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा था कि चुनाव समाप्त होने वाले हैं और 23 मई को मतगणना है। ऐसे में यदि याचिका पर तुरंत सुनवाई नहीं होगी तो यह महत्वहीन हो जाएगी।
याचिका में कहा गया था कि वीवीपैट पर्चियों के मिलान में केवल दो फीसदी की वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी और इससे अदालत के आदेश से पहले की स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आयेगा। इसलिए, याचिकाकर्ता मेरिट के आधार पर अपनी दलीलों में सफल भले रहे हों मगर उनकी यह सफलता उनकी शिकायत का समाधान नहीं करती है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की पहले की टिप्पणी का जिक्र करते हुये कहा है कि उसने कहा था कि ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों में औचक मिलान की प्रक्रिया में दो प्रतिशत की वृद्धि से चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने का मकसद पूरा नहीं होगा।
