पीएम मोदी को हर मामले में क्लीन चिट दिए जाने पर चुनाव आयोग में एक राय नहीं

पीएम मोदी को हर मामले में क्लीन चिट दिए जाने पर चुनाव आयोग में एक राय नहीं

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के मामलो में पीएम नरेंद्र मोदी को लगातार क्लीन चिट दिए जाने को लेकर चुनाव आयोग में एक राय नहीं है। आयोग के सभी सदस्य पीएम मोदी को हर मामले में क्लीनचिट दिए जाने से सहमत नहीं हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला 2-1 के बहुमत से लिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के अलावा दो अन्य चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुशील चंद्रा ने इस बारे में वोटिंग की थी। अखबार ने बताया इनमें से एक आयुक्त प्रधानमंत्री के पक्ष में नहीं थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग अधिनियम, 1991 की धारा-10 में कहा गया है कि ‘जहां तक संभव हो चुनाव आयोग का कामकाज सबकी सहमति से चलना चाहिए।‘ यह प्रावधान यह भी कहता है कि अगर किसी मामले में ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों में मतभेद हो तो ऐसे मामले में बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए।‘

गौरतलब है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अब तक पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन की 11 शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायतों पर ज़्यादा गंभीरता नहीं दिखाई। जिसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर चुनाव आयोग अपनी शक्तियों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहा ?

चुनाव आयोग ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन के मामलो की जल्द सुनवाई करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को एक के बाद एक मामले में क्लीनचिट दे दी। विपक्ष द्वारा शिकायत के साथ सौंपे गए वीडियो के बावजूद चुनाव आयोग ने शिकायतों को बेहद हल्के में लेते हुए हर मामले में क्लीनचिट दे दी। यहाँ तक कि किसी भी मामले में हिदायत तक नहीं दी गयी।

चुनाव आयोग ने जिन दो बयानों पर पीएम मोदी को क्लीन चिट दी, उनमें से एक उन्होंने एक अप्रैल को वर्धा में दिया था। इसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष बहुसंख्यकों वाले चुनावी क्षेत्रों से भाग रहे हैं और उन इलाकों (वायनाड) में चुनाव लड़ रहे हैं जहां अल्पसंख्यक बहुसंख्यक हैं। आयोग को मोदी के इस बयान में जिन प्रतिनिधि कानून की संबंधित धाराओं का उल्लंघन नहीं दिखा था।

इतना ही नहीं लातूर में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश के नए मतदाता वोट देते समय पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों और बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम देने वाले वीर पायलटों को ध्यान में रखें। चुनाव आयोग ने इस बयान को भी क्लीन चिट दे दी। हालांकि यह स्पष्ट रूप से आयोग के उस निर्देश का उल्लंघन था जिसमें उसने सेना और सैनिकों के चुनावी इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। वहीं, उस्मानाबाद जिले के चुनाव अधिकारी ने भी अपनी जांच में इस बयान को ‘अनुचित’ पाया था।

TeamDigital