चुनावी सर्वेक्षण कंपनियों के बदल रहे सुर, चौथे चरण के बाद ठंडे पड़े दावे
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के बाद अब चुनाव सर्वेक्षण करने वाली कंपनियों के सुर बदलना शुरू हो गए हैं। लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को 300 प्लस सीटें देने वाले चुनावी विश्लेषक अब अपनी राय बदल रहे हैं।
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण करने वाली एक कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अब चूँकि देश में आधी से अधिक लोकसभा सीटों के लिए चुनाव हो चुके हैं, इसलिए कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव पूर्व दिखाए गए अधिकांश सर्वेक्षण गलत साबित हो सकते हैं।
शीर्ष अधिकारी ने कहा कि लोकसभा चुनाव शुरू होने से पहले उत्तर भारत, पूर्वोत्तर और पश्चिम में जिस मोदी लहर के बरकरार होने की संभावनाओं को आधार बनाकर सर्वेक्षण तैयार किये गए थे, वे चौथे चरण के चुनाव के बाद धूमिल होते दिख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चौथे चरण के चुनाव के बाद अब यह कहा जा सकता है कि बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु यहाँ तक कि गुजरात में भी बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं दिख रहा। ऐसे में लोकसभा चुनाव पूर्व दिखाए गए सर्वेक्षणों में कम से कम 100 से 110 सीटों का फर्क देखने को मिल सकता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या महाराष्ट्र और बिहार में एनडीए गठबंधन उम्मीदों पर खरा उतरेगा ? अधिकारी ने कहा कि दोनी ही राज्यों में एनडीए को बंपर सफलता नहीं मिलती दिख रही लेकिन ओडिशा में बीजेपी का प्रदर्शन अन्य राज्यों की तुलना में कहीं बेहतर दिखाई दे रहा है।
एक सवाल के जबाव में अधिकारी ने कहा कि केवल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात मिलाकर ही बीजेपी को 2014 के मुकाबले 75-80 सीटों का घाटा होता दिख रहा है।
अधिकारी ने कहा कि अब तक जितनी भी जगह चुनाव हो चुके हैं, वहां मतदाताओं में बीजेपी के लिए 2014 जैसा जोश नहीं दिखा है। इसके अलावा शहरी इलाको में कम मतदान बीजेपी के वोट प्रतिशत पर भी असर डाल सकता है।
गौरतलब है कि देश में सात चरणों में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। अब तक चार चरणों का चुनाव पूरा हो चूका है। चुनावी नतीजे 23 मई को घोषित किये जाएंगे। ऐसे में देखना है कि लोकसभा चुनाव पूर्व चुनाव विश्लेषण कंपनियों द्वारा दिखाए गए प्री पोल सर्वे कितने खरे कितने खोटे साबित होते हैं।
