तीन तलाक विधेयक लोकसभा में पारित, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का वॉकआउट

तीन तलाक विधेयक लोकसभा में पारित, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का वॉकआउट

नई दिल्ली। तीन तलाक बिल को लोकसभा ने बहुमत से पारित कर दिया है। अब इसे राज्यसभा में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कांग्रेस और एआईएडीएमके ने इस बिल के विरोध में वॉकआउट किया और वोटिंग के दौरान सदन में नहीं थे। वहीं, समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

सदन में मौजूद 256 सांसदों में से 245 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 11 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया। असदुद्दीन ओवैसी के तीन संशोधन प्रस्ताव भी गिर गए और कई अन्य संशोधन प्रस्तावों को भी मंजूरी नहीं मिली।

इससे पहले दिसंबर 2017 में भी लोकसभा से तीन तलाक बिल को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन राज्यसभा में गिर गया था। इसके बाद सरकार को तीन तलाक पर अध्यादेश लाना पड़ा था। अब सरकार ने एक बार फिर से संशोधित बिल पेश किया था लेकिन सरकार के लिए राज्यसभा से इसे पारित कराना चुनौती होगी क्योंकि वहां एनडीए का बहुमत नहीं है।

इससे पहले दिन भर बिल को लेकर लोकसभा में चली चर्चा के दौरान पक्ष-विपक्ष में हंगामा चलता रहा। वोटिंग से पहले कांग्रेस समेत अन्य कई दलों ने सदन से वॉक आउट कर दिया था। भाजपा और कांग्रेस ने चर्चा के मद्देनजर अपने-अपने सांसदों को व्हिप जारी किया था। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने बिल को ज्वाइंट सलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की थी जबकि सरकार इसे तत्काल पारित कराने के पक्ष में दिखी।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मेरी गुजारिश है कि बिल को ज्वाइंट सलेक्ट कमिटी के पास भेजा जाए। 15 दिन में इस पर रिपोर्ट तलब हो। उन्होंने कहा कि सरकार किसी धार्मिक मामले में हस्तक्षेप कर रही है। इस बिल से करोड़ों महिलाएं प्रभावित होंगी और उनकी रक्षा जरूरी है। यह बिल समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का बिल है। यह संविधान के खिलाफ हैं, मुस्लिम पर्सनल लॉ के खिलाफ है। आर्टिकल 21 और 25 का उल्लंघन करता है। कांग्रेस, टीएमसी समेत कई अन्य दलों के सांसद तीन तलाक बिल को ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की।

सत्ता पक्ष ने क्या कहा:

चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इस देश ने वह मंजर भी देखा जब दहेज लेने का कुछ लोगों ने समर्थन किया, लेकिन सदन ने इसे अपराध माना. सती प्रथा को भी खत्म किया गया। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि महिलाओं के लिए सरकार ने की काम किए हैं। बिल को राजनीतिक रूप न दिया जाए।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह इस्लाम धर्म से संबंधित मामला नहीं, यह एक सामाजिक कुरीति है। इसी तरह से सती प्रथा और बाल विवाह को भी खत्म किया गया। इस्लामिक देशों ने दशकों पहले तीन तलाक की कुरीति को खत्म किया।

इससे पहले चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि पाकिस्तान भी भारत से सीख लेकर तीन तलाक को आपराधिक बनाने पर विचार कर रहा है। इसमें कोई राजनीति नहीं। 22 इस्लामिक मुल्कों ने भी तीन तलाक को नियंत्रित किया है, कई तरह के प्रावधान जोड़े गए हैं। अब सवाल उठाया जा रहा है कि पीड़ित महिलाओं को भत्ता और मुआवजा कैसे मिलेगा, इसे मजिस्ट्रेट के विवेक पर छोड़ दिया गया।

रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि मामले में आपत्ति थी कि कोई पड़ोसी मामला न दर्ज करा दे और सुलह भी हो सकती है, इसलिए इनमें सुधार किए गए। महिलाओं से संबंधित कई अन्य अपराधों में भी सजा का प्रावधान है, उसमें तो किसी को आपत्ति नहीं हुई। तीन तलाक के मामले में सजा के प्रावधान पर क्यों किसी को आपत्ति हो रही है।

TeamDigital