दिग्विजय की नर्मदा यात्रा पड़ रही बीजेपी को भारी, महज औचारिकताएँ पूरी कर रही बीजेपी
भोपाल ब्यूरो (राजाज़ैद)। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दूसरे पड़ाव में बीजेपी के आत्मविश्वास में हो रही गिरावट बड़े साफ़ तौर पर उभर कर सामने आ रही है। इसका अहम कारण बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले इलाको में ही जनता द्वारा पार्टी का विरोध है।
चुनाव प्रचार के दूसरे और महत्वपूर्ण पड़ाव पर नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि बीजेपी अब महज प्रचार की औपचारिकताएं पूरी कर रही है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार हैं। पिछले चुनाव में जिन क्षेत्रो में बीजेपी को उम्मीद से अधिक मत मिला, आज उन्ही क्षेत्रो में बीजेपी का विरोध हो रहा है।
बुधनी विधानसभा में बीजेपी के परम्परागत गढ़ो में जनता के विरोध का सामना खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय सिंह कर चुके हैं। यदि सीएम की विधानसभा में पार्टी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य विधानसभा क्षेत्रो में पार्टी उम्मीदवारों का कितना विरोध झेलना पड़ रहा होगा।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावो को लेकर बीजेपी दिल्ली और भोपाल में बैठकर जो दावे कर रही है वे दावे धरातल पर बेहद कमज़ोर दिखाई दे रहे हैं। अभी हाल ही में ग्वालियर में पीएम मोदी की सभा में जनता की कमी और बीच भाषण से जनता का उठकर जाना बीजेपी के लिए आने वाले खतरे के बड़े संकेत हैं।
खतरों के इन सकेतो के बावजूद भी यदि दिल्ली से मध्य प्रदेश प्रचार के लिए आ रहे बीजेपी नेता बड़े दावे करें तो ये सिर्फ औपचारिकताएं ही हैं जिन्हे चुनाव के मौको पर पार्टियां मज़बूरी में दोहराती हैं।
गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से सटे इलाको में बीजेपी को सबसे ज़्यादा नाउम्मीदी मिल रही है। ये वे इलाके हैं जहाँ कभी बीजेपी की तूती बोलती थी लेकिन इस बार इन इलाको में बीजेपी का बड़ा विरोध देखने को मिल रहा है।
इतना ही नहीं मध्यप्रदेश का केंद्रीय हिस्सा कहे जाने वाले विधानसभा क्षेत्रो में भी पार्टी की स्थति पहले जैसी नहीं हैं। पूरे चुनाव प्रचार की अगुवाई स्वयं सीएम शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं जबकि शिवराज का उन्ही की विधानसभा में विरोध हो रहा है।
ज़मीनी हकीकत को देखें तो पता चलता है कि अगस्त सितम्बर से शुरू हुई सरकार विरोधी हवा की गति अब और तेज हो गयी है और अब जनता बदलाव की बात कर रही है। किसानो, सवर्णो और बेरोज़गारो की नाराज़गी इस बार बीजेपी को भारी पड़ती दिख रही है।
इसके पलट कांग्रेस कछुआ चाल से चुनाव में आगे बढ़ रही है। इस बार चुनाव में पार्टी हर कदम सोच कर चल रही है। पार्टी के नेताओं की तरफ से बड़ी बयानबाजियां नहीं हो रहीं। बीजेपी के तरफ से लग रहे आरोपों का जबाव खुद प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ दे रहे हैं। दिग्विजय सिंह परदे के पीछे से अपने अनुभव का लाभ पार्टी को पहुंचा रहे हैं।
नर्मदा बनेगी बीजेपी की मुसीबत:
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा की गयी नर्मदा परिक्रमा का असर अब नर्मदा के आसपास के इलाको में साफ़ दिखाई दे रहा है। जहाँ जहाँ होकर नर्मदा बहती है वहां के इलाको में बीजेपी की जड़ें कमज़ोर पड़ी हैं।
वहीँ कम्प्यूटर बाबा सहित संतो की शिवराज सरकार से नाराज़गी के चलते बीजेपी का भगवा सन्देश कमज़ोर पड़ा है। हालाँकि संघ के लोग ग्रामीण इलाको में काम कर रहे हैं लेकिन इस बार मामला पिछले चुनावो की तरह एकतरफा नहीं है।
फिलहाल यह माना जा रहा है कि बीजेपी को अपने आंतरिक सर्वे के माध्यम से आने वाले खतरे के संकेत मिल चुके हैं। यही कारण है कि सचिवालय में तेज गति से फाइलों को पूरा किया जा रहा है।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पिछले वर्ष सितंबर में करीब 3500 किलोमीटर लम्बी नर्मदा यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह प्रतिदिन करीब 20 से 30 किलोमीटर तक पैदल चलकर 140 विधानसभा क्षेत्रो से गुजरे थे। इनमे 114 विधानसभा क्षेत्र मध्य प्रदेश के थे।
